बजट 2026: इनकम टैक्स में राहत की उम्मीदें और नई व्यवस्था की चुनौतियाँ
बजट 2026 की तैयारी
नई दिल्ली: 1 फरवरी को आम बजट पेश किया जाएगा, जिससे टैक्सपेयर्स की नजरें इनकम टैक्स पर टिकी हैं। हर साल की तरह, इस बार भी सबसे बड़ा सवाल यह है कि सरकार आयकर में कितनी राहत प्रदान करेगी। पिछले बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने नई टैक्स व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण बदलाव किए थे। टैक्स स्लैब को सरल बनाया गया और टैक्स छूट की सीमा को बढ़ाया गया, ताकि अधिक से अधिक लोग नई व्यवस्था को अपनाएं।
नई टैक्स व्यवस्था की चुनौतियाँ
हालांकि, टैक्स विशेषज्ञों का मानना है कि बजट 2026 में इनकम टैक्स में बड़ी राहत की संभावना कम है। फिर भी, सरकार नई टैक्स व्यवस्था को और आकर्षक बनाने के लिए कुछ आवश्यक बदलाव कर सकती है। पुरानी व्यवस्था में कई ऐसे लाभ हैं, जिनके कारण करदाता उसे छोड़ने को तैयार नहीं हैं।
नई व्यवस्था की कमी
नई टैक्स व्यवस्था की सबसे बड़ी कमी यह है कि इसमें टैक्स बचाने के लिए बहुत कम डिडक्शन उपलब्ध हैं। वर्तमान में केवल स्टैंडर्ड डिडक्शन और एनपीएस में एम्प्लॉयर के योगदान पर ही छूट मिलती है। HRA, मेडिकल इंश्योरेंस प्रीमियम और सेक्शन 80C जैसे लोकप्रिय टैक्स बेनिफिट इसमें शामिल नहीं हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार कुछ आवश्यक डिडक्शन को नई व्यवस्था में शामिल कर दे, तो यह अधिक व्यावहारिक हो सकती है।
स्टैंडर्ड डिडक्शन में वृद्धि की संभावना
मेडिकल खर्च लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन नई व्यवस्था में मेडिक्लेम डिडक्शन की सुविधा नहीं है। टैक्स विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार स्टैंडर्ड डिडक्शन की सीमा बढ़ा देती है, तो यह सैलरीपेशा लोगों के लिए बड़ी राहत होगी। कई लोग इसी कारण से पुरानी व्यवस्था में बने हुए हैं। यदि स्टैंडर्ड डिडक्शन को 1 लाख या उससे अधिक किया जाता है, तो महंगाई का असर कुछ हद तक कम किया जा सकता है और कर्मचारियों की टेक-होम सैलरी भी बढ़ेगी।
एजुकेशन और होम लोन पर राहत
वर्तमान में एजुकेशन लोन और होम लोन से जुड़े टैक्स फायदे केवल पुरानी व्यवस्था में ही मिलते हैं। विशेषज्ञों का सुझाव है कि इन डिडक्शन को नई व्यवस्था में भी शामिल किया जाना चाहिए। चूंकि ये लोन बैंक और वित्तीय संस्थानों से जुड़े होते हैं, इसलिए इनका रिकॉर्ड पहले से मौजूद रहता है और टैक्स कंप्लायंस में कोई परेशानी नहीं होगी। इससे नई व्यवस्था अधिक भरोसेमंद और उपयोगी बन सकती है।
सीनियर सिटिजन्स के लिए राहत की आवश्यकता
नई टैक्स व्यवस्था वरिष्ठ नागरिकों के लिए भी ज्यादा आकर्षक नहीं है। इसमें न तो अधिक बेसिक टैक्स छूट मिलती है और न ही हेल्थ इंश्योरेंस पर कोई विशेष डिडक्शन। बढ़ती उम्र के साथ मेडिकल खर्च तेजी से बढ़ता है, यही कारण है कि अधिकतर सीनियर सिटिजन्स अब भी पुरानी व्यवस्था को चुनते हैं। उम्मीद है कि बजट 2026 में सरकार उनके लिए कुछ खास राहत का ऐलान कर सकती है।
पुरानी व्यवस्था की लोकप्रियता
जिन कर्मचारियों की सैलरी में HRA शामिल होता है, उनके लिए पुरानी टैक्स व्यवस्था अधिक फायदेमंद साबित होती है। इसमें HRA, 80C के तहत निवेश पर छूट, हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम और होम लोन के ब्याज पर मिलने वाली छूट जैसे कई लाभ शामिल हैं। यही कारण है कि नई व्यवस्था के कम स्लैब होने के बावजूद कई लोग पुरानी व्यवस्था को छोड़ने को तैयार नहीं हैं।
यदि सरकार को नई टैक्स व्यवस्था को वास्तव में लोकप्रिय बनाना है, तो उसे कुछ आवश्यक डिडक्शन और सीनियर सिटिजन्स के लिए अतिरिक्त राहत देने पर गंभीरता से विचार करना होगा। बजट 2026 से टैक्सपेयर्स को इसी दिशा में किसी ठोस घोषणा की उम्मीद है।
