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बॉम्बे हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: ट्रेडर को 1.75 करोड़ रुपये का मुनाफा रखने की अनुमति

बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण मामले में ट्रेडर को 1.75 करोड़ रुपये का मुनाफा रखने की अनुमति दी है, जो कोटक सिक्योरिटीज की तकनीकी गड़बड़ी के कारण प्राप्त हुआ। अदालत ने कहा कि ट्रेडर ने अपनी समझ और जोखिम उठाकर यह मुनाफा कमाया है। कोटक सिक्योरिटीज ने इस फैसले के खिलाफ अपील की है, और अगली सुनवाई 4 फरवरी 2026 को होगी। जानें इस मामले की पूरी कहानी और अदालत के निर्णय के पीछे के तर्क।
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बॉम्बे हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: ट्रेडर को 1.75 करोड़ रुपये का मुनाफा रखने की अनुमति

महत्वपूर्ण निर्णय


बॉम्बे हाईकोर्ट ने शेयर बाजार से संबंधित एक महत्वपूर्ण मामले में एक बड़ा निर्णय सुनाया है। अदालत ने एक एफएंडओ (फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस) ट्रेडर को 1.75 करोड़ रुपये का मुनाफा अपने पास रखने की अनुमति दी है, जो उसे कोटक सिक्योरिटीज की तकनीकी गलती के कारण प्राप्त हुआ।


20 मिनट में कमाई

2022 में, ट्रेडर गजानन राजगुरु के ट्रेडिंग खाते में गलती से 40 करोड़ रुपये का मार्जिन दिखाई देने लगा। यह स्थिति कोटक सिक्योरिटीज की तकनीकी खामी के कारण उत्पन्न हुई। इस अतिरिक्त मार्जिन का उपयोग करते हुए, ट्रेडर ने लगभग 20 मिनट में एफएंडओ ट्रेडिंग करके 1.75 करोड़ रुपये का लाभ कमाया।


ब्रोकरेज की गलती

कुछ समय बाद, ब्रोकरेज ने अपनी गलती का पता लगाया और 40 करोड़ रुपये का अतिरिक्त मार्जिन खाते से हटा लिया। हालांकि, कंपनी ने ट्रेडर से मुनाफे की राशि भी वापस मांग ली।


कोर्ट का निर्णय

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि कोटक सिक्योरिटीज को इस प्रक्रिया में कोई आर्थिक नुकसान नहीं हुआ है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि ट्रेडर ने अपनी समझ और जोखिम उठाकर मुनाफा कमाया है, न कि किसी धोखाधड़ी के माध्यम से। इसलिए इसे 'अनुचित लाभ' कहना गलत होगा।


ब्रोकरेज की स्थिति

अदालत ने यह भी कहा कि ब्रोकरेज कंपनी के लिए यह 'विन-विन' स्थिति नहीं हो सकती, जिसमें वह नुकसान होने पर ट्रेडर से पैसा वसूले और मुनाफा होने पर खुद रख ले। यह न्यायसंगत नहीं है।


समझौते की कोशिश

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कोटक सिक्योरिटीज ने बाद में समझौते का प्रयास किया था। कंपनी ने ट्रेडर को 50 लाख रुपये देने और बाकी 1.25 करोड़ रुपये खुद रखने का प्रस्ताव रखा, लेकिन ट्रेडर ने इसे अस्वीकार कर दिया। कोटक सिक्योरिटीज ने इस फैसले के खिलाफ अपील की है, और मामले की अगली सुनवाई 4 फरवरी 2026 को होगी। तब तक हाईकोर्ट का यह अंतरिम आदेश लागू रहेगा।