भविष्य निधि खातों के लिए नया डिजिटल मंच: ई-प्राप्ति की शुरुआत
कर्मचारियों के भविष्य निधि संगठन ने निष्क्रिय खातों के लिए एक नया डिजिटल प्लेटफॉर्म 'ई-प्राप्ति' लॉन्च किया है। यह प्लेटफॉर्म सदस्यों को आधार आधारित सत्यापन के माध्यम से अपने खातों की जानकारी प्राप्त करने और उन्हें सक्रिय करने में मदद करेगा। इस पहल से लाखों लोगों को अपने पुराने खातों तक पहुंच बनाने में सहायता मिलेगी। जानें इस नई प्रणाली के बारे में और कैसे यह प्रक्रिया को सरल बनाएगी।
| Apr 30, 2026, 21:42 IST
भविष्य निधि खातों के लिए नई पहल
भविष्य निधि खातों को लेकर एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। कर्मचारियों के भविष्य निधि संगठन ने एक नया डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित करने का निर्णय लिया है, जिससे सदस्यों को निष्क्रिय खातों तक पहुंच प्राप्त करना आसान होगा। इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से सदस्य आधार आधारित सत्यापन का उपयोग करके अपने निष्क्रिय खातों की जानकारी हासिल कर सकेंगे और उन्हें फिर से सक्रिय कर पाएंगे।
ई-प्राप्ति: नया डिजिटल प्लेटफॉर्म
इस नए प्लेटफॉर्म का नाम ई-प्राप्ति रखा गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य उन सदस्यों की सहायता करना है जिनके पास सार्वभौमिक खाता संख्या नहीं है या जिनके खाते पुराने तरीकों से चल रहे थे। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने बताया कि यह प्रणाली पुराने खातों की पहचान, उनके स्थान का पता लगाने, खाता संख्या जोड़ने और सक्रिय करने की प्रक्रिया को सरल बनाएगी।
सदस्य पहचान संख्या के आधार पर कार्य
शुरुआत में, यह प्लेटफॉर्म सदस्य पहचान संख्या के आधार पर कार्य करेगा, और भविष्य में इसे उन लोगों के लिए भी विस्तारित किया जाएगा जिन्हें अपने पुराने खाते की जानकारी नहीं है। अधिकारियों का मानना है कि इस कदम से कागजी कार्यवाही में कमी आएगी और कार्य में तेजी आएगी।
निष्क्रिय खातों का समाधान
इस बदलाव के दौरान मौजूदा प्रणाली को नए प्लेटफॉर्म पर स्थानांतरित करने के लिए कुछ समय के लिए बंद किया जा सकता है। इसके अलावा, संगठन ने छोटे खातों का स्वतः निपटान करने की योजना बनाई है, विशेष रूप से उन खातों के लिए जिनमें एक हजार रुपये या उससे कम की राशि है।
निष्क्रिय खातों की पहचान
निष्क्रिय खाते वे होते हैं जिनमें एक निश्चित समय के बाद कोई योगदान नहीं होता। आमतौर पर, 55 वर्ष की आयु के बाद या सेवानिवृत्ति के बाद यदि तीन साल तक कोई जमा नहीं होता है, तो खाता निष्क्रिय माना जाता है। हालांकि, 55 वर्ष से कम आयु के मामलों में 58 वर्ष तक ब्याज मिलता रहता है।
लाखों खातों की संख्या
वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, ऐसे खातों की संख्या लाखों में है और इनमें हजारों करोड़ रुपये जमा हैं। यह पहल उन लाखों लोगों के लिए राहत लेकर आ सकती है जो अपने पुराने खातों तक पहुंच नहीं बना पा रहे थे। हाल के वर्षों में दावों के निपटान की प्रक्रिया भी तेजी से बढ़ी है, और अधिकतर मामलों में स्वतः प्रणाली के माध्यम से कम समय में निपटान किया जा रहा है।
