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भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की नई संभावनाएं: प्रतिनिधिमंडल की यात्रा

भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर गतिविधियाँ तेज हो गई हैं। अमेरिकी राजदूत ने बताया कि इस महीने के अंत में एक भारतीय प्रतिनिधिमंडल वाशिंगटन का दौरा करेगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अनुपस्थिति में कोई अन्य वरिष्ठ अधिकारी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर सकता है। समझौते के तहत अमेरिका ने भारत पर आयात शुल्क को 50% से घटाकर 18% करने पर सहमति जताई है, जिससे भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में सस्ते होंगे। जानें इस समझौते के अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं के बारे में।
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भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की नई संभावनाएं: प्रतिनिधिमंडल की यात्रा

भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता में तेजी


भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर गतिविधियाँ फिर से बढ़ गई हैं। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने गुरुवार को जानकारी दी कि इस महीने के अंत में एक भारतीय प्रतिनिधिमंडल वाशिंगटन का दौरा करेगा। उन्होंने एक्स पर साझा किया कि उनकी अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर के साथ रचनात्मक चर्चा हुई है, जिसमें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की दक्षिण और मध्य एशिया में व्यापार प्राथमिकताओं पर बात की गई। फरवरी 2026 में दोनों देशों ने एक महत्वपूर्ण व्यापार समझौते पर सहमति जताई थी, जिसे अब लागू किया जाना है.


वित्त मंत्री की अनुपस्थिति

इस प्रतिनिधिमंडल में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण शामिल होने वाली थीं, लेकिन अब वह यात्रा नहीं करेंगी। दरअसल, संसद में महिला आरक्षण बिल को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा होनी है। सीतारमण लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण से संबंधित बिलों को पेश करने की प्रक्रिया में शामिल होंगी। ऐसे में उनकी जगह कोई अन्य वरिष्ठ अधिकारी इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर सकता है.


समझौते के लाभ

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि यह शिष्टमंडल किस स्तर का होगा, लेकिन राजदूत गोर ने इसे लेकर उत्साह व्यक्त किया है। भारत और अमेरिका के बीच यह व्यापार समझौता लंबी बातचीत के बाद तय हुआ था, और अब इस पर हस्ताक्षर करने की तैयारी है। विपक्ष ने इस समझौते की कुछ शर्तों पर सवाल उठाए हैं, लेकिन सरकार इसे दोनों देशों के लिए लाभकारी मानती है.


भारत को मिलने वाले फायदे

इस समझौते की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अमेरिका ने भारत पर लगने वाले टैरिफ (आयात शुल्क) को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने पर सहमति जताई है। इसका मतलब है कि भारतीय उत्पाद अब अमेरिकी बाजार में सस्ते हो जाएंगे। इसके अलावा, भारत ने अगले पांच वर्षों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर के उत्पाद खरीदने का वादा किया है, जिसमें ऊर्जा उत्पाद, विमान, धातु, कोयला और तकनीकी सामान शामिल हैं.


रूसी तेल पर शर्तें

व्हाइट हाउस द्वारा जारी एक तथ्य पत्र के अनुसार, इस समझौते की एक महत्वपूर्ण शर्त यह है कि भारत रूस से तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की खरीद को बंद कर देगा। हालांकि, ईरान के साथ युद्ध के कारण भारत को कुछ विशेष रूसी तेल की खरीद की अनुमति दी गई है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इन सीमित खरीद से मॉस्को को कोई विशेष आर्थिक लाभ नहीं होगा.


समझौते की कार्यान्वयन तिथि

अब सभी की नजर इस महीने के अंत में होने वाली वाशिंगटन यात्रा पर है। माना जा रहा है कि इस दौरे के बाद समझौते पर औपचारिक रूप से हस्ताक्षर किए जा सकते हैं। हालांकि अमेरिकी राजदूत ने कोई निश्चित तारीख नहीं बताई है, लेकिन 'इसी महीने' कहकर उन्होंने संकेत दिया है कि बातचीत अंतिम चरण में है.