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भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर नई टैरिफ नीति का इंतजार

भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते पर काम जारी है, लेकिन नई टैरिफ नीति के इंतजार में हस्ताक्षर टल गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले ने स्थिति को बदल दिया है, जिससे कई टैरिफ नियम समाप्त हो गए हैं। सरकार अब निर्यात बढ़ाने की योजना बना रही है, खासकर पश्चिम एशिया में संभावित नुकसान की भरपाई के लिए। जानें इस व्यापारिक स्थिति का विस्तार से।
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भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर नई टैरिफ नीति का इंतजार

भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते की प्रगति


भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर कार्य जारी है। सरकार का कहना है कि इस समझौते पर हस्ताक्षर तब होंगे जब अमेरिका अपनी नई टैरिफ नीति को अंतिम रूप दे देगा। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने बताया कि दोनों देशों के बीच बातचीत चल रही है और समझौते को लेकर कोई विवाद नहीं है, लेकिन नई टैरिफ व्यवस्था स्पष्ट होने के बाद ही आगे की प्रक्रिया को पूरा किया जाएगा।


सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का प्रभाव

इस वर्ष की शुरुआत में अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया था। अदालत ने राष्ट्रपति के उस अधिकार को समाप्त कर दिया, जिसके तहत वे अपने आदेश से आयात पर शुल्क लगा सकते थे। इस निर्णय के बाद कई पूर्व निर्धारित टैरिफ नियम समाप्त हो गए हैं। अब अमेरिकी प्रशासन नई टैरिफ संरचना तैयार कर रहा है, जिसके कारण भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर फिलहाल टल गए हैं।


मार्च में समझौते की उम्मीद

सरकार के अनुसार, प्रारंभ में यह उम्मीद थी कि यह समझौता मार्च में हो जाएगा, लेकिन अदालत के निर्णय के बाद परिस्थितियां बदल गईं। वर्तमान में अमेरिका में अस्थायी रूप से एक अन्य प्रावधान के तहत टैरिफ लगाए जा रहे हैं, जो कुछ महीनों तक लागू रहेंगे। इसके बाद नई व्यवस्था आने की संभावना है।


पश्चिम एशिया के व्यापार पर प्रभाव

वाणिज्य सचिव ने यह भी बताया कि अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चल रहे तनाव का असर भारत के व्यापार पर भी पड़ सकता है। विशेष रूप से पश्चिम एशिया के देशों के साथ व्यापार में कुछ समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। जहाजों की आवाजाही और हवाई कार्गो में देरी जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं, जिससे निर्यात और आयात दोनों प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, सरकार का मानना है कि यह प्रभाव बहुत बड़ा नहीं होगा और स्थिति को संभालने के लिए बातचीत की जा रही है।


निर्यात बढ़ाने की योजना

सरकार पश्चिम एशिया में संभावित नुकसान की भरपाई दूसरे बाजारों में निर्यात बढ़ाकर करने की योजना बना रही है। इसके लिए कुछ नई सहायता योजनाओं पर विचार किया जा रहा है, जिनकी घोषणा जल्द की जा सकती है। सरकार को उम्मीद है कि चालू वित्त वर्ष में देश का कुल वस्तु और सेवा निर्यात लगभग 860 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। अधिकारियों का कहना है कि इस साल का निर्यात पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर रहने का लक्ष्य है।