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भारत का जीएसटी संग्रह: घरेलू मांग में कमी के बावजूद 6.1% की वृद्धि

दिसंबर 2025 के लिए भारत का जीएसटी संग्रह 6.1% की वृद्धि दर्शाता है, लेकिन घरेलू मांग में कमी आई है। आयात से जुड़े कर संग्रह ने इस कमी को संतुलित किया है। रिफंड में तेज बढ़ोतरी और मुआवजा सेस में गिरावट ने राजस्व संरचना को प्रभावित किया है। जानें इस रिपोर्ट में और क्या खास है और राज्यों का योगदान कैसे रहा।
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भारत का जीएसटी संग्रह: घरेलू मांग में कमी के बावजूद 6.1% की वृद्धि

भारत का जीएसटी संग्रह: अस्थायी आंकड़े


नई दिल्ली: दिसंबर 2025 के लिए जारी अस्थायी आंकड़ों के अनुसार, भारत का वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह संतुलित है, लेकिन यह बदलते रुझानों को दर्शाता है। कुल जीएसटी राजस्व में सालाना आधार पर 6.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, हालांकि घरेलू मांग की गति सीमित रही। आयात से जुड़े कर संग्रह ने इस कमी को काफी हद तक संभाला है। रिफंड में तेज बढ़ोतरी और मुआवजा सेस में गिरावट ने राजस्व संरचना को नया आकार दिया है।


घरेलू जीएसटी संग्रह की सुस्त चाल

दिसंबर 2025 में घरेलू जीएसटी संग्रह अपेक्षाकृत कमजोर रहा। सकल घरेलू राजस्व 1.22 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि से केवल 1.2 प्रतिशत अधिक है। सीजीएसटी और एसजीएसटी में हल्की बढ़ोतरी देखी गई, जबकि घरेलू आईजीएसटी में मामूली गिरावट आई। यह अंतरराज्यीय आपूर्ति और उपभोग में सीमित गतिविधि को दर्शाता है।


आयात से मिला राजस्व को सहारा

इस महीने जीएसटी वृद्धि का सबसे बड़ा आधार आयात कर रहा है। आयात पर आईजीएसटी संग्रह 19.7 प्रतिशत बढ़कर 51,977 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में बदलाव और ऊंचे आयात मूल्य इसके पीछे प्रमुख कारण रहे हैं। अप्रैल से दिसंबर 2025 के दौरान आयात आधारित जीएसटी 13.8 प्रतिशत बढ़कर 4.41 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो घरेलू वृद्धि से कहीं तेज है।


रिफंड में उछाल का असर

दिसंबर 2025 में जीएसटी रिफंड 30.9 प्रतिशत बढ़कर 28,980 करोड़ रुपये हो गए। घरेलू रिफंड में 62 प्रतिशत की तेज बढ़ोतरी ने शुद्ध घरेलू राजस्व को प्रभावित किया। इसके चलते नेट घरेलू जीएसटी 5.1 प्रतिशत घटकर 1.04 लाख करोड़ रुपये रह गया। हालांकि, आयात से मिले अधिक शुद्ध राजस्व ने कुल संग्रह को संतुलित बनाए रखा।


शुद्ध जीएसटी और सेस की स्थिति

रिफंड समायोजन के बाद दिसंबर 2025 में शुद्ध जीएसटी राजस्व 1.45 लाख करोड़ रुपये रहा, जो सालाना आधार पर 2.2 प्रतिशत अधिक है। वहीं, मुआवजा सेस संग्रह में तेज गिरावट देखी गई। शुद्ध सेस 4,238 करोड़ रुपये पर सिमट गया, क्योंकि इसका उपयोग पुराने मुआवजा ऋण चुकाने में किया जा रहा है।


राज्यों का योगदान और आगे का संकेत

दिसंबर 2025 में राज्यों को मिलने वाला एसजीएसटी 6 प्रतिशत बढ़ा। महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और तमिलनाडु अग्रणी रहे। पूर्वोत्तर राज्यों में प्रतिशत वृद्धि अधिक रही, हालांकि, आधार छोटा है। अप्रैल से दिसंबर 2025 में कुल राज्य जीएसटी 7.57 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। आंकड़े बताते हैं कि आयात और अनुपालन से जीएसटी प्रणाली फिलहाल स्थिर बनी हुई है।