भारत का नया स्टार्टअप फंड: तकनीकी क्रांति की ओर कदम
भारत सरकार का स्टार्टअप फंड ऑफ फंड्स
भारत सरकार ने अपने 10,000 करोड़ रुपये के 'स्टार्टअप फंड ऑफ फंड्स' (FoF 2.0) का दायरा बढ़ाकर स्टार्टअप क्षेत्र में एक नई क्रांति की शुरुआत की है। अब सरकार का ध्यान 'क्विक कॉमर्स' और 'डिलीवरी ऐप्स' से हटकर AI, सेमीकंडक्टर, रक्षा प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रिक वाहन, जलवायु प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष जैसे गहन तकनीकी क्षेत्रों पर केंद्रित होगा। सरकार का उद्देश्य भारत को केवल एक उपभोक्ता बाजार के रूप में नहीं, बल्कि उच्च तकनीकी निर्माण में एक वैश्विक खिलाड़ी बनाना है, ताकि हम दुनिया को आधुनिक तकनीक बेच सकें।
फंड का प्रबंधन और लक्ष्य
इस फंड का संचालन SIDBI (भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक) द्वारा किया जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, इस 10,000 करोड़ रुपये के निवेश में एक 'मल्टीप्लायर इफेक्ट' शामिल है, जिसका लक्ष्य निजी क्षेत्र से अतिरिक्त पूंजी को आकर्षित करना है, जिससे कुल निवेश 40,000 से 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। सरकारी सहायता केवल उन फंड्स को मिलेगी जो अपनी पूंजी का एक बड़ा हिस्सा गहन तकनीकी स्टार्टअप्स में निवेश करेंगे।
सेमीकंडक्टर में आत्मनिर्भरता
भारत वर्तमान में सेमीकंडक्टर और उच्च गुणवत्ता वाले इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है। FoF 2.0 इस निर्भरता को समाप्त करने का एक साधन बनेगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और चिप निर्माण में लगे स्टार्टअप्स को 'प्रायोरिटी सेक्टर' के रूप में फंडिंग दी जाएगी। इसका उद्देश्य भारत को 'सेवा अर्थव्यवस्था' से 'उत्पाद राष्ट्र' में बदलना है, जहां हम अपनी चिप्स और उपग्रहों का निर्माण कर सकें।
डिफेंस टेक्नोलॉजी और क्लीन एनर्जी
वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए, सरकार अब रक्षा प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ा रही है। इसलिए, एंटी-ड्रोन सिस्टम, साइबर सुरक्षा और उन्नत हथियारों पर काम करने वाले स्टार्टअप्स को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इसके साथ ही, 2070 के नेट-जीरो लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए जलवायु प्रौद्योगिकी और इलेक्ट्रिक वाहन स्टार्टअप्स, जो भारत में बैटरी सेल निर्माण कर रहे हैं, को इस फंड से महत्वपूर्ण सहायता मिलेगी।
मेड इन इंडिया हार्डवेयर
DPIIT के नए दृष्टिकोण के तहत, अब स्टार्टअप्स को केवल सॉफ्टवेयर या ऐप्स बनाने तक सीमित नहीं रखा जाएगा। सरकार हार्डवेयर निर्माण के लिए भी बड़ी सहायता और निवेश की सुविधा प्रदान कर रही है। इसका अर्थ है कि भविष्य में भारतीय स्टार्टअप्स न केवल दुनिया के लिए कोडिंग करेंगे, बल्कि उन्नत इंजीनियरिंग और जटिल हार्डवेयर उत्पादों का निर्माण भी भारत में करेंगे।
