भारत का बैंकिंग सिस्टम: विपरीत परिस्थितियों में भी मजबूती से आगे बढ़ता
फिक्की और भारतीय बैंक संघ का सर्वेक्षण
फिक्की और इंडियन बैंक एसोसिएशन के सर्वे में बात आई सामने
भारत का बैंकिंग सिस्टम (बिजनेस डेस्क): वैश्विक स्तर पर फैली विपरीत परिस्थितियों के बावजूद, भारत लगातार प्रगति कर रहा है। भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है, और बैंकिंग प्रणाली भी पहले से कहीं अधिक मजबूत हो गई है।
यह जानकारी फिक्की और इंडियन बैंक एसोसिएशन द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण में सामने आई है। सर्वे में बताया गया है कि बैंकिंग क्षेत्र की वृद्धि के लिए सकारात्मक माहौल है, जो मजबूत बैलेंस शीट और अर्थव्यवस्था में स्थिर गतिविधियों के कारण है।
सर्वे में यह भी उल्लेख किया गया है कि मौजूदा मौद्रिक नीति संतुलित है और इसमें बड़े बदलाव की संभावना कम है। हालांकि, कुछ सहकारी बैंकों ने ब्याज दरों में हल्की वृद्धि की उम्मीद जताई है। बैंकों को उम्मीद है कि आने वाले महीनों में कर्ज की मांग बढ़ेगी, विशेषकर रिटेल और छोटे-मध्यम उद्योगों से। सरकारी बैंकों की एसेट क्वालिटी में सुधार हुआ है, जिससे वे भविष्य के प्रति अधिक आश्वस्त हैं।
हर बैंक की स्थिति का विस्तृत विश्लेषण
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि निजी बैंक थोड़ी सावधानी से आगे बढ़ रहे हैं, जबकि विदेशी बैंक कॉरपोरेट क्षेत्र में निवेश के लिए संतुलित दृष्टिकोण अपना रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, सेवा क्षेत्र जैसे रियल एस्टेट, वित्तीय सेवाएं, लॉजिस्टिक्स और पर्यटन में बढ़ती गतिविधियों के कारण लोन की मांग मजबूत बनी रहेगी। लगभग 46% लोगों का मानना है कि नॉन-फूड क्रेडिट ग्रोथ 11% से 13% के बीच रह सकती है।
बैंकों के सामने चुनौतियाँ
रिटेल लोन भी बैंकिंग क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण सहारा बना रहेगा। छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए लोन की मांग में वृद्धि की उम्मीद है, क्योंकि इस क्षेत्र में व्यापार बढ़ रहा है और सरकार भी इसे समर्थन दे रही है। हालांकि, बैंकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती साइबर सुरक्षा है। ऑनलाइन धोखाधड़ी और डिजिटल जोखिम तेजी से बढ़ रहे हैं, जिससे बैंकों को सतर्क रहने की आवश्यकता है।
