भारत का व्यापार घाटा: सोने-चांदी के आयात में वृद्धि का प्रभाव
व्यापार घाटा रिकॉर्ड स्तर पर
बैंक ऑफ बड़ौदा की नई रिपोर्ट के अनुसार, देश का व्यापार घाटा 333.3 अरब डॉलर के ऐतिहासिक उच्च स्तर पर पहुँच गया है।
सोने-चांदी का आयात (बिजनेस डेस्क): वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों के कारण, सभी विकासशील अर्थव्यवस्थाएँ चुनौतियों का सामना कर रही हैं। इस स्थिति में, भारत जैसे तेजी से विकसित हो रहे देशों का व्यापार घाटा भी तेजी से बढ़ा है। यह जानकारी बैंक ऑफ बड़ौदा की हालिया रिपोर्ट में दी गई है।
रिपोर्ट के मुख्य बिंदु
रिपोर्ट में बताया गया है कि सोने और चांदी के आयात में वृद्धि के कारण वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारत का व्यापार घाटा 333.3 अरब डॉलर तक पहुँच गया। यदि भू-राजनीतिक स्थिति स्थिर रहती है और कच्चे तेल की कीमतें घटती हैं, तो आने वाले महीनों में व्यापार घाटे में कमी की संभावना है।
इसके अलावा, रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिम एशिया में संघर्ष के बावजूद भारत की आर्थिक बुनियाद मजबूत बनी हुई है। जैसे-जैसे भू-राजनीतिक बाधाएँ समाप्त होंगी और नए व्यापार समझौतों का समर्थन मिलेगा, भारत के बाहरी क्षेत्र के प्रदर्शन में सुधार की उम्मीद है। इससे न केवल निर्यात में वृद्धि होगी, बल्कि कमोडिटी की कीमतों में कमी से आयात बिल में भी कमी आएगी।
कच्चे तेल का प्रभाव
हालांकि, यदि ये बाधाएँ बनी रहती हैं और कच्चे तेल तथा अन्य कमोडिटी की कीमतें बढ़ती हैं, तो चालू खाता घाटे पर दबाव बढ़ सकता है। सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 में चालू खाता घाटा जीडीपी के 1.5 से 2 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान लगाया है।
रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का निर्यात 441.7 अरब डॉलर रहा, जो केवल 0.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। जबकि आयात 721 अरब डॉलर से बढ़कर 775 अरब डॉलर हो गया। इस प्रकार, कुल व्यापार घाटा 333 अरब डॉलर के पार पहुँच गया। सेवाओं के निर्यात में वृद्धि के कारण कुल व्यापार घाटा (वस्तुओं और सेवाओं को मिलाकर) 119.3 अरब डॉलर रहा।
