भारत की अर्थव्यवस्था: 2047 तक उच्च मध्यम-आय वाले देश बनने की दिशा में
भारत की आर्थिक वृद्धि की संभावनाएं
भारत, जो दुनिया की सबसे तेजी से विकसित हो रही बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, अपनी विकास दर को बनाए रखने के लिए अच्छी स्थिति में है। 2047 तक, जब देश अपनी स्वतंत्रता के सौ साल पूरे करेगा, उच्च मध्यम-आय वाले राष्ट्र बनने की महत्वाकांक्षा के साथ, यह आर्थिक विकास, संरचनात्मक सुधार और सामाजिक प्रगति की मजबूत नींव पर आगे बढ़ रहा है।
हाल ही में संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत 2026 में 6.6% की प्रभावशाली वृद्धि दर हासिल करेगा। वैश्विक चुनौतियों के बावजूद, भारत का प्रदर्शन 'असाधारण' रहने की उम्मीद है। निजी खपत और सरकारी निवेश में मजबूती के चलते, अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ते अमेरिकी शुल्कों का भारतीय अर्थव्यवस्था पर विशेष प्रभाव नहीं पड़ेगा।
आर्थिक विकास के कारक
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत 'चुनौतीपूर्ण वैश्विक माहौल में असाधारण रूप से उच्च वृद्धि' दर्ज करेगा। मजबूत निजी उपभोग और सार्वजनिक निवेश से अमेरिकी शुल्क के प्रभाव की भरपाई होने की संभावना है।
आर्थिक वृद्धि दर 2025 में अनुमानित 7.4 प्रतिशत से घटकर 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है। विभाग ने यह भी कहा कि भारत विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि निजी उपभोग में मजबूती, सार्वजनिक निवेश में वृद्धि, हालिया कर सुधार और कम ब्याज दरों से निकट भविष्य में वृद्धि को समर्थन मिलने की उम्मीद है। हालांकि, यदि मौजूदा दरें बनी रहती हैं, तो अमेरिका द्वारा लगाए गए उच्च शुल्क 2026 में निर्यात प्रदर्शन पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं, क्योंकि भारत से होने वाले कुल निर्यात में अमेरिकी बाजार की हिस्सेदारी लगभग 18 प्रतिशत है।
दक्षिण एशिया की विकास दर
संयुक्त राष्ट्र विकास एजेंसी (यूएन डीईएसए) के वरिष्ठ अर्थशास्त्री इंगो पिटर्ले ने कहा कि दक्षिण एशिया दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ता क्षेत्र बना रहेगा, जिसकी विकास दर 5.6 प्रतिशत रहने की उम्मीद है।
इस वृद्धि में भारत का योगदान सबसे अधिक रहेगा, जहां मजबूत घरेलू मांग, अच्छी फसल से समर्थित मुद्रास्फीति में कमी और निरंतर नीतिगत समर्थन वृद्धि को गति दे रहे हैं।
यूएन डीईएसए के निदेशक शांतनु मुखर्जी ने बताया कि भारत के निर्यात बाजारों का यूरोपीय संघ और पश्चिम एशिया की ओर विविधीकरण हुआ है।
वैश्विक आर्थिक परिदृश्य
मुखर्जी ने यह भी कहा कि भारत में 'वृद्धि के घरेलू कारक असाधारण रूप से मजबूत रहे हैं' और इस समय भारत से होने वाले सबसे मजबूत निर्यातों में से एक सेवाओं का निर्यात है।
रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक आर्थिक वृद्धि दर 2025 में 2.8 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो 2026 में घटकर 2.7 प्रतिशत हो सकती है। इसके बाद 2027 में यह बढ़कर 2.9 प्रतिशत होने की संभावना है, जो वैश्विक महामारी से पहले (2010-2019) के औसत 3.2 प्रतिशत से काफी कम है।
यूरोप, जापान और अमेरिका में वृद्धि दर स्थिर रहने के साथ मध्यम गति से बढ़ने का अनुमान है। कई बड़ी विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में मजबूत घरेलू मांग या लक्षित नीतिगत उपायों के कारण ठोस वृद्धि जारी रहने की उम्मीद है।
भारत की वैश्विक स्थिति
भारत ने वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स आपूर्ति श्रृंखलाओं में अपनी स्थिति को मजबूत किया है।
इसके अलावा, IMF की अप्रैल 2025 की वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने 4.18 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की GDP के साथ जापान को पीछे छोड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। अगले 2.5 से 3 वर्षों में, यह जर्मनी को तीसरे स्थान से हटाने के लिए तैयार है, जिसका अनुमानित GDP 2030 तक 7.3 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर होगा।
विकास की गति ने और भी ज़्यादा चौंकाया, 2025-26 की दूसरी तिमाही में GDP छह-तिमाही के उच्चतम स्तर पर पहुँच गई, जो लगातार वैश्विक व्यापार अनिश्चितताओं के बीच भारत के लचीलेपन को दर्शाता है। मज़बूत निजी खपत के नेतृत्व वाले घरेलू कारकों ने इस विस्तार को समर्थन देने में केंद्रीय भूमिका निभाई।
