भारत की आर्थिक वृद्धि की संभावनाएं मजबूत, वैश्विक मंदी की आशंका
वैश्विक आर्थिक वृद्धि में गिरावट की चेतावनी
विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) ने हाल ही में एक रिपोर्ट जारी की है जिसमें कहा गया है कि अगले वर्ष वैश्विक आर्थिक वृद्धि में कमी आने की संभावना है। भारत इस संदर्भ में मजबूत वृद्धि की संभावनाओं वाले देशों में अग्रणी बना हुआ है।
यह रिपोर्ट एक सर्वेक्षण पर आधारित है जिसमें विश्वभर के लगभग 90 प्रतिशत अर्थशास्त्रियों ने वैश्विक वृद्धि में गिरावट की आशंका व्यक्त की है, जबकि 13 प्रतिशत ने वैश्विक मंदी की संभावना जताई है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 94 प्रतिशत अर्थशास्त्रियों का मानना है कि ऊर्जा और खाद्य आपूर्ति में बाधाएं महंगाई को बढ़ा सकती हैं।
भारत और अमेरिका की स्थिति
डब्ल्यूईएफ ने कहा कि मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत और अमेरिका अपेक्षाकृत मजबूत स्थिति में रह सकते हैं, जिन्हें घरेलू मांग और निवेश का समर्थन प्राप्त होगा।
सर्वेक्षण में होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने को पिछले वर्ष के संकट की तुलना में अधिक गंभीर समस्या माना गया है।
अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि यदि यह स्थिति वर्ष की दूसरी छमाही तक बनी रहती है, तो इसका प्रभाव कोविड-19 महामारी जैसी गंभीरता तक पहुंच सकता है, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, ऊर्जा और खाद्य लागत पर व्यापक असर पड़ेगा।
भारत की वृद्धि की संभावनाएं
डब्ल्यूईएफ की प्रबंध निदेशक सादिया जाहिदी ने कहा, "जितना अधिक समय यह गतिरोध चलेगा, उतनी ही अधिक दीर्घकालिक लागत उन लोगों पर पड़ेगी जो इसका बोझ उठाने में सबसे कम सक्षम हैं।"
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि इस संकट का सबसे अधिक प्रभाव पश्चिम एशिया और उत्तर अफ्रीका पर पड़ने की संभावना है, जबकि भारत और अमेरिका अपेक्षाकृत मजबूत बने रह सकते हैं।
भारत के संदर्भ में, 52 प्रतिशत अर्थशास्त्रियों ने यहां मजबूत या बहुत मजबूत वृद्धि की उम्मीद जताई है, जिससे यह सबसे बेहतर प्रदर्शन वाला देश बना हुआ है।
भारत की आर्थिक नीतियां
रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय अर्थव्यवस्था 2026-27 में 6.5 प्रतिशत की दर से बढ़ सकती है, हालांकि पश्चिम एशिया संकट के चलते कुछ जोखिम बने हुए हैं।
डब्ल्यूईएफ ने कहा कि बड़े उभरते बाजारों में भारत पैमाने, वृद्धि और संभावनाओं का सबसे स्पष्ट मिश्रण प्रस्तुत करता है।
भारत ने व्यापार और पूंजी प्रवाह के रास्ते लगातार खोले हैं, सक्रिय आर्थिक नीति अपनाई है और बाजार पहुंच का विस्तार किया है। हालांकि, वैश्विक जोखिम बढ़ रहे हैं और ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव एक प्रमुख चिंता बनी हुई है।
