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भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एथेनॉल का महत्व बढ़ा

भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एथेनॉल पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। नए ड्राफ्ट नोटिफिकेशन के अनुसार, सरकार ने पेट्रोल में एथेनॉल के मिश्रण को बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। इससे न केवल पर्यावरण की रक्षा होगी, बल्कि महंगे पेट्रोल पर निर्भरता भी कम होगी। प्रधानमंत्री मोदी ने संसद में एथेनॉल ब्लेंडिंग की सफलता पर चर्चा की, जबकि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने पारंपरिक ईंधनों के भविष्य के बारे में चेतावनी दी। जानें इस नई नीति के पीछे के कारण और इसके संभावित लाभ।
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भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एथेनॉल का महत्व बढ़ा

नई दिशा में ऊर्जा नीति


नई दिल्ली: भारत अब अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए विदेशी तेल पर निर्भरता कम कर रहा है और स्वदेशी एथेनॉल को प्राथमिकता दे रहा है। सड़क परिवहन मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नए ड्राफ्ट नोटिफिकेशन ने भविष्य की 'फ्लेक्स-फ्यूल' वाहनों के लिए रास्ता खोल दिया है। सरकार ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाने का लक्ष्य रखा है, और अब इसे 100 प्रतिशत तक बढ़ाने की योजना है। यह कदम न केवल पर्यावरण की रक्षा करेगा, बल्कि महंगे पेट्रोल से राहत देते हुए देश के विदेशी मुद्रा भंडार को भी सुरक्षित रखेगा।


मोटर वाहन अधिनियम में संशोधन

मंत्रालय ने 27 अप्रैल को मोटर वाहन अधिनियम के तहत एक ड्राफ्ट पेश किया है, जिसका मुख्य उद्देश्य 'सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स 1989' में संशोधन करना है। इसमें ईंधन के वर्गीकरण और 'हाई एथेनॉल ब्लेंड' से संबंधित तकनीकी मानकों को शामिल किया गया है। अब वाहनों के लिए E85 और E100 जैसे मानकों को भी मान्यता दी गई है, जिसका अर्थ है कि भविष्य में गाड़ियाँ पूरी तरह से एथेनॉल पर आधारित ईंधन का उपयोग कर सकेंगी।


आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में कदम

पिछले साल अप्रैल में देशभर में E20 ईंधन, यानी 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को अनिवार्य रूप से लागू किया गया था। अब सरकार का ध्यान पेट्रोलियम उत्पादों के आयात को कम करने पर केंद्रित है। यदि पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बढ़ती है, तो देश को कच्चा तेल विदेश से खरीदने की आवश्यकता कम होगी। इससे न केवल करोड़ों रुपये की बचत होगी, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।


प्रधानमंत्री मोदी ने एथेनॉल के लाभ बताए

हाल ही में बजट सत्र के दौरान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में एथेनॉल ब्लेंडिंग की सफलता पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि पिछले एक दशक में भारत ने 1-2 प्रतिशत से बढ़कर 20 प्रतिशत तक एथेनॉल मिलाने की उपलब्धि हासिल की है। इस नीति के कारण भारत सालाना लगभग 4.5 करोड़ बैरल पेट्रोल के आयात को कम करने में सफल रहा है, जो दर्शाता है कि एथेनॉल देश के लिए कितना महत्वपूर्ण हो गया है।


पारंपरिक ईंधनों का भविष्य

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने वाहन निर्माताओं को स्पष्ट संदेश दिया है कि पेट्रोल और डीजल जैसे पारंपरिक ईंधनों का भविष्य अब समाप्त होने वाला है। उन्होंने कंपनियों से अपील की है कि वे अपनी तकनीक को बायोफ्यूल और अन्य वैकल्पिक ऊर्जा की ओर मोड़ें। गडकरी के अनुसार, पेट्रोल-डीजल न केवल महंगे हैं, बल्कि ये पर्यावरण और विदेशी मुद्रा भंडार के लिए एक बड़ी समस्या बन चुके हैं, जिसका समाधान वैकल्पिक ईंधन ही है।