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भारत की खाद्य प्रोसेसिंग उद्योग में संभावनाएं और चुनौतियां

भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध, आम और केला उत्पादक देश है, लेकिन हर साल एक तिहाई फसल बर्बाद हो जाती है। इस बर्बादी में खाद्य प्रोसेसिंग उद्योग के लिए एक बड़ा अवसर छिपा है। 2024 में इस क्षेत्र का बाजार आकार 354 बिलियन डॉलर था और 2030 तक यह 700 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। सरकार ने इस उद्योग को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं बनाई हैं, जिससे किसानों की आय में वृद्धि हो सकती है। जानें इस उद्योग की संभावनाएं और चुनौतियां।
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भारत की खाद्य प्रोसेसिंग उद्योग में संभावनाएं और चुनौतियां

भारत की कृषि उत्पादकता और खाद्य बर्बादी

भारत दूध, आम और केले का सबसे बड़ा उत्पादक देश है। गेहूं और चावल में हम दूसरे स्थान पर हैं। हालांकि, इतनी बड़ी उत्पादन के बावजूद, एक गंभीर समस्या है। हर साल, देश की एक तिहाई फसल बाजार में पहुंचने से पहले ही बर्बाद हो जाती है। टमाटर सड़ जाते हैं, फल खराब होते हैं, और इससे किसानों को नुकसान होता है। इस बर्बादी में एक बड़ा अवसर छिपा है, जिसे खाद्य प्रोसेसिंग उद्योग कहा जाता है.


खाद्य प्रोसेसिंग उद्योग का विकास

2024 में इस क्षेत्र का बाजार आकार 354 बिलियन डॉलर, यानी लगभग 30 लाख करोड़ रुपये था, और 2030 तक यह 700 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। सीधे शब्दों में कहें तो आने वाले वर्षों में यह उद्योग दोगुना हो जाएगा.


फसल बर्बादी का आंकड़ा

NITI Aayog के अनुसार, हर साल 90,000 करोड़ रुपये से अधिक की फसल केवल इसलिए बर्बाद होती है क्योंकि उचित कोल्ड स्टोरेज और परिवहन की सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। इसका मतलब है कि जो आज कचरा बन रहा है, वह कल प्रोसेस होकर पैकेट में बिक सकता है। इससे किसानों को बेहतर मूल्य मिलेगा, कंपनियों को लाभ होगा, और देश की अर्थव्यवस्था को भी फायदा होगा.


खाद्य प्रोसेसिंग में सरकारी पहल

इस वर्ष के बजट में खाद्य प्रोसेसिंग मंत्रालय को 4,364 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। PLI योजना के लिए 1,444 करोड़ रुपये और छोटे उद्यमियों के लिए PMFME योजना में 2,000 करोड़ रुपये अलग से रखे गए हैं। इसके अलावा, देशभर में 41 मेगा फूड पार्क स्थापित किए जा चुके हैं और 399 कोल्ड चेन परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है.


रोजगार के अवसर

यह उद्योग वर्तमान में 7.6 लाख से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान कर रहा है। जैसे-जैसे नई फैक्ट्रियां, फूड पार्क और कोल्ड चेन विकसित होंगे, यह संख्या और बढ़ेगी। खास बात यह है कि इसमें किसानों से लेकर पैकेजिंग श्रमिकों तक सभी के लिए रोजगार के अवसर हैं.


किसानों की आय में वृद्धि

NABARD (राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक) का कहना है कि यदि किसानों को सही कोल्ड चेन सुविधाएं मिलें, तो उनकी आय 15 से 20% तक बढ़ सकती है। सरकार का लक्ष्य है कि खाद्य प्रोसेसिंग का कृषि GDP में हिस्सा 10% से बढ़ाकर 25% किया जाए। इसका मतलब है कि आने वाले वर्षों में जो किसान केवल फसल उगाते थे, उनकी फसल अब पैकेट बनकर वैश्विक बाजार में जाएगी. यही इस गोल्ड रश की सबसे बड़ी ताकत है.