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भारत की जीडीपी 2030 तक 7.3 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने की संभावना

भारत की जीडीपी 2030 तक 7.3 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने की संभावना है, जिससे यह जर्मनी को पीछे छोड़कर तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक ने विकास अनुमान को बढ़ाकर 7.3 प्रतिशत कर दिया है, और वैश्विक कंपनियों का विश्वास इस वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। जानें रुपये की साख और अमेरिका के साथ व्यापार समझौते की आवश्यकता के बारे में।
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भारत की जीडीपी 2030 तक 7.3 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने की संभावना

भारत की अर्थव्यवस्था की वृद्धि की दिशा


सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत की जीडीपी 4.18 ट्रिलियन डॉलर है, और यह अगले 2.5 से 3 वर्षों में जर्मनी को पीछे छोड़कर तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है।


बिजनेस डेस्क: वर्ष 2025 में वैश्विक व्यापार और आर्थिक परिदृश्य में कई महत्वपूर्ण घटनाएं हुईं। अमेरिका ने अपनी टैरिफ नीति में बदलाव किया, जिसके परिणामस्वरूप कई देशों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा। हालांकि, भारत पर इसका प्रभाव सीमित रहा, क्योंकि सरकार ने समय पर जीएसटी सुधार लागू किए और निर्यातकों के लिए राहत पैकेज की घोषणा की। इसके फलस्वरूप, 2025-26 की दूसरी तिमाही में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 8.2 प्रतिशत तक पहुंच गई, जिससे यह जापान को पीछे छोड़कर चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया।


सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत की जीडीपी 4.18 ट्रिलियन डॉलर है, और यह अगले 2.5 से 3 वर्षों में जर्मनी को पीछे छोड़कर तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है। अनुमान है कि 2030 तक भारत की जीडीपी 7.3 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगी।


आरबीआई का विकास अनुमान

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अपने विकास अनुमान को 6.8 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.3 प्रतिशत कर दिया है। विश्व बैंक, आईएमएफ और मूडीज जैसी अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने भी इस सकारात्मक दृष्टिकोण की पुष्टि की है। भारत में वैश्विक कंपनियों का विश्वास बना हुआ है। माइक्रोसॉफ्ट, अमेजन और गूगल जैसी कंपनियों ने बड़े निवेश की घोषणा की है। इसके अलावा, एप्पल, सैमसंग और आर्सेलर मित्तल निप्पॉन स्टील जैसी कंपनियां अपनी विस्तार योजनाओं को तेजी से आगे बढ़ा रही हैं।


रुपये की साख और अमेरिका से व्यापार समझौता

विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौता निर्यात को बढ़ावा दे सकता है, लेकिन यह रुपये की गिरावट को रोकने के लिए पर्याप्त नहीं होगा। अल्पकालिक में, रुपये का मूल्य 92-93 के स्तर तक जा सकता है, लेकिन अप्रैल 2026 के बाद वैश्विक पूंजी के पुनर्गठन और डॉलर की संभावित कमजोरी से रुपये की स्थिति 83-84 के स्तर तक मजबूत हो सकती है।