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भारत की जीडीपी वृद्धि दर के आंकड़े 27 फरवरी को होंगे जारी

भारत की जीडीपी वृद्धि दर के नए आंकड़े 27 फरवरी को जारी होने वाले हैं। इस बार जीडीपी का बेस ईयर 2011-12 से बदलकर 2022-23 किया गया है, जिससे डिजिटल वाणिज्य और सेवा क्षेत्र के प्रभाव को बेहतर तरीके से दर्शाया जा सकेगा। आरबीआई गर्वनर ने भी महंगाई दर के लक्ष्यों की समीक्षा की बात की है। जानें घरेलू मांग और आर्थिक वृद्धि पर इसके क्या प्रभाव पड़ सकते हैं।
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भारत की जीडीपी वृद्धि दर के आंकड़े 27 फरवरी को होंगे जारी

नई प्रणाली के तहत आंकड़ों का अनावरण


India GDP Growth Rate (बिजनेस डेस्क): वैश्विक आर्थिक अस्थिरता और अमेरिका की बदलती टैरिफ नीतियों का असर भारत समेत कई देशों पर पड़ सकता है। हालांकि, भारत की अर्थव्यवस्था पर इसका प्रभाव सीमित रहने की संभावना है। पिछले वर्ष अमेरिका द्वारा लागू किए गए 50 प्रतिशत उच्च टैरिफ का भी भारतीय अर्थव्यवस्था पर कोई विशेष असर नहीं पड़ा था, क्योंकि घरेलू मांग ने जीडीपी की वृद्धि को बनाए रखा।


भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) 27 फरवरी को जीडीपी वृद्धि के नए आंकड़े जारी करने जा रहा है। भारत अपने जीडीपी का बेस ईयर 2011-12 से बदलकर 2022-23 करने जा रहा है, जिससे नए आंकड़े 27 फरवरी 2026 को सामने आएंगे। यह नया बेस ईयर डिजिटल वाणिज्य और सेवा क्षेत्र के बढ़ते प्रभाव को बेहतर तरीके से दर्शाएगा। पहली अग्रिम रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है।


आरबीआई गर्वनर का बयान

उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) का बेस ईयर भी 2024 कर दिया गया है। आरबीआई के गर्वनर संजय मल्होत्रा के अनुसार, इसके आधार पर अप्रैल की मौद्रिक नीति में महंगाई दर के लक्ष्यों के संशोधित ढांचे की समीक्षा की जाएगी।


घरेलू मांग से मिल रही मजबूती

व्यापार नीतियों में हो रहे बड़े बदलावों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था अपने मजबूत घरेलू आधार के बल पर मजबूती से खड़ी है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि 8.1 प्रतिशत के करीब रहने का अनुमान है। दूसरी ओर, मूडीज एनालिटिक्स की एक रिपोर्ट यह संकेत देती है कि अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा प्रस्तावित 15 प्रतिशत के एकमुश्त टैरिफ से वैश्विक व्यापार और विशेष रूप से एशिया-प्रशांत क्षेत्र के व्यापारिक समीकरणों में बड़े बदलाव आ सकते हैं।


घरेलू खपत से मिली रफ्तार

एसबीआई की रिपोर्ट इस बात पर जोर देती है कि भारत की आर्थिक वृद्धि का मुख्य इंजन उसकी घरेलू मांग है। कृषि और गैर-कृषि दोनों क्षेत्रों से मिल रहे सकारात्मक संकेतों के कारण ग्रामीण खपत मजबूत बनी हुई है। इसके साथ ही, पिछले त्योहारी सीजन के खर्च और राजकोषीय प्रोत्साहन से शहरी खपत में भी निरंतर सुधार देखने को मिला है।