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भारत की विकास दर वैश्विक अस्थिरता के बीच स्थिर: आईएमएफ रिपोर्ट

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के मुख्य अर्थशास्त्री पियरे-ओलिवियर गौरींचस ने भारत की विकास दर को वैश्विक अस्थिरता के बीच स्थिर बताया है। उन्होंने 2025 में 7.6 प्रतिशत और 2026 में 6.5 प्रतिशत विकास दर का अनुमान लगाया है। हालांकि, मुद्रास्फीति और ऊर्जा आयात पर निर्भरता जैसी चुनौतियाँ भी सामने हैं। जानें इस रिपोर्ट में और क्या कहा गया है और भारत की अर्थव्यवस्था की स्थिति क्या है।
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भारत की विकास दर वैश्विक अस्थिरता के बीच स्थिर: आईएमएफ रिपोर्ट

भारत की अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन सराहनीय


अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के मुख्य अर्थशास्त्री पियरे-ओलिवियर गौरींचस ने हाल ही में कहा है कि वैश्विक ऊर्जा संकट और अस्थिरता के बावजूद भारत की विकास दर स्थिर बनी हुई है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के कारण जहां अन्य देशों की अर्थव्यवस्थाएं संकट में हैं, वहीं भारत की स्थिति सकारात्मक बनी हुई है।


गौरींचस ने भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि 2025 में भारत का आर्थिक विकास 7.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यह रिपोर्ट उन चिंताओं को कम करती है जो कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के प्रभाव को लेकर थीं।


भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर

आईएमएफ ने 2026 के लिए भारत की विकास दर का अनुमान 6.5 प्रतिशत रखा है, जो पिछले अनुमानों से थोड़ा अधिक है। हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध का अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है, लेकिन 2025 से मिली मजबूत आर्थिक गति इस नुकसान की भरपाई कर रही है।


हालांकि विकास दर के आंकड़े उत्साहजनक हैं, मुद्रास्फीति एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। आईएमएफ का अनुमान है कि 2026 में भारत की महंगाई दर 4.7 प्रतिशत तक पहुंच सकती है, जिसका मुख्य कारण वैश्विक ऊर्जा कीमतों में वृद्धि और खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतें हैं।


ऊर्जा और तेल आयात की चुनौतियाँ

गौरींचस ने चेतावनी दी है कि भारत की ऊर्जा और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता एक बड़ी कमजोरी साबित हो सकती है। यह संरचनात्मक निर्भरता भविष्य में अर्थव्यवस्था की गति के लिए नई बाधाएं उत्पन्न कर सकती है।


हालांकि, अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक संबंधों में सुधार एक राहत की बात है। हालिया व्यापारिक चर्चाओं ने न केवल टैरिफ में अनिश्चितता को कम किया है, बल्कि टैरिफ के स्तर को भी घटाया है। ऐसे समय में जब कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं मंदी का सामना कर रही हैं, आईएमएफ का यह आकलन भारत को वैश्विक विकास के एक प्रमुख इंजन के रूप में स्थापित करता है।