भारत के कृषि उत्पादों पर जापान और चीन के प्रतिबंध से बढ़ी चिंता
जापान ने ताजे आमों पर लगाया प्रतिबंध
इस वर्ष, जापान ने भारत से आने वाले ताजे आमों की खरीद पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। वहीं, चीन ने भी भारतीय बासमती चावल को खराब बताकर बार-बार वापस भेज दिया है। इन दोनों निर्णयों के कारण भारत के कृषि क्षेत्र को गंभीर नुकसान हो रहा है, और वैश्विक स्तर पर भारतीय उत्पादों की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। इस मामले में भारत सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है.
जापान के अधिकारियों की जांच में मिली कमियां
जापान ने इस सीजन में भारत से आने वाले ताजे आमों पर रोक लगाने का निर्णय तब लिया जब जापानी अधिकारियों की एक टीम उत्तर प्रदेश के रहमानपुर में स्थित एक वेपर हीट ट्रीटमेंट प्लांट का निरीक्षण करने आई। इस दौरे के दौरान, टीम ने आमों की सफाई और कीट नियंत्रण के तरीकों में कई कमियां पाई.
जापान के सख्त नियम और भारतीय आमों का निर्यात
जापान में फ्रूट फ्लाई कीट के प्रति बहुत सख्त नियम हैं, और किसी भी लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाता। इस फैक्ट्री की खामियों के कारण भारत के प्रमुख आम जैसे अल्फोंसो, केसर, लंगड़ा और बंगनपल्ली का निर्यात पूरी तरह से रुक गया है। इससे उन किसानों को बड़ा झटका लगा है जो इन विशेष आमों की खेती के लिए साल भर मेहनत करते हैं.
चीन ने बासमती चावल को क्यों लौटाया?
चीन के कस्टम विभाग ने भारतीय बासमती चावल को लगभग 70 बार रिजेक्ट कर वापस भेज दिया है। अधिकारियों का कहना है कि चावल में 'खपरा बीटल' नामक कीड़े पाए गए हैं और कीटाणुनाशक की मात्रा भी तय सीमा से अधिक थी।
बासमती चावल का व्यापार
व्यापार के आंकड़ों के अनुसार, चीन भारतीय बासमती चावल का बड़ा खरीदार नहीं है। भारत हर साल चीन को केवल 1,000 से 2,000 टन बासमती चावल भेजता है, जो कुल बासमती निर्यात का केवल 0.01% से 0.05% है। असल में, चीन भारत से आम चावल और टूटा हुआ चावल अधिक खरीदता है।
भारत पर प्रभाव
जापान भारत के आमों का सबसे बड़ा खरीदार नहीं है, क्योंकि भारत के अधिकांश आम UAE, अमेरिका और ब्रिटेन को भेजे जाते हैं। फिर भी, जापान और चीन के निर्णयों से भारत के कृषि क्षेत्र को नुकसान हुआ है। बासमती चावल से भारत को विदेशी मुद्रा की अच्छी कमाई होती है।
भविष्य की चुनौतियाँ
भारत के कृषि उत्पादों का खाद्य गुणवत्ता मानक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मेल नहीं खा रहा है। घरेलू प्रोसेसिंग केंद्रों और थर्मल ट्रीटमेंट प्लांट में पुरानी तकनीक का उपयोग किया जा रहा है, जिससे जांच और कीटाणुशोधन की प्रक्रिया सही नहीं हो रही है। यदि यह स्थिति बनी रही, तो अन्य देश भी भारतीय फलों और अनाज पर प्रतिबंध लगा सकते हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की विश्वसनीयता प्रभावित होगी.
