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भारत के जेम और ज्वैलरी निर्यात में गिरावट: अमेरिका को निर्यात में 44% की कमी

भारत के जेम और ज्वैलरी उद्योग में निर्यात के ताजा आंकड़े चिंता का विषय बने हुए हैं। अमेरिका को निर्यात में 44% की गिरावट आई है, जबकि अन्य देशों को निर्यात में वृद्धि देखी गई है। जीजेईपीसी के अध्यक्ष ने टैरिफ अनिश्चितता और अमेरिका में विवेकाधीन खर्च में कमी को इसके प्रमुख कारण बताया है। सूरत में हीरा प्रसंस्करण पर भी वैश्विक हालात का असर पड़ा है। जानें इस उद्योग की वर्तमान स्थिति और भविष्य की संभावनाओं के बारे में।
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भारत के जेम और ज्वैलरी निर्यात में गिरावट: अमेरिका को निर्यात में 44% की कमी

भारत के जेम और ज्वैलरी निर्यात पर ताजा आंकड़े


नई दिल्ली: जेम एंड ज्वैलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (GJEPC) ने हाल ही में भारत के रत्न और आभूषण उद्योग से संबंधित नवीनतम आंकड़े जारी किए हैं, जो एक ओर राहत और दूसरी ओर चिंता का कारण बनते हैं। परिषद के अनुसार, अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच भारत का कुल रत्न और आभूषण निर्यात लगभग स्थिर रहा, लेकिन अमेरिका को निर्यात में भारी कमी आई है।


निर्यात में गिरावट के आंकड़े

रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 के पहले नौ महीनों में भारत का अनंतिम रत्न और आभूषण निर्यात 20.75 अरब डॉलर रहा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में केवल 0.41 प्रतिशत की कमी दर्शाता है। हालांकि, रुपये के संदर्भ में इसमें 3.69 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो यह दर्शाता है कि मूल्य स्तर पर उद्योग ने कुछ हद तक संतुलन बनाए रखा है।


अमेरिका को निर्यात में भारी गिरावट

अमेरिका को निर्यात में 44% की बड़ी गिरावट


अमेरिका को निर्यात में आई तेज गिरावट सबसे अधिक चिंता का विषय है। अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान अमेरिका को निर्यात 44 प्रतिशत घटकर 3.86 अरब डॉलर रह गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 6.95 अरब डॉलर था। अकेले दिसंबर 2025 में अमेरिका को निर्यात में सालाना आधार पर 50.44 प्रतिशत की कमी आई।


टैरिफ अनिश्चितता का प्रभाव

टैरिफ अनिश्चितता पर उद्योग की चिंता


जीजेईपीसी के अध्यक्ष किरित भंसाली ने कहा कि अमेरिका को शिपमेंट में आई गिरावट चिंताजनक है। उन्होंने बताया कि लंबे समय से बनी टैरिफ संबंधी अनिश्चितता भारतीय निर्यातकों के लिए अमेरिकी बाजार की दीर्घकालिक व्यवहार्यता पर नकारात्मक असर डाल सकती है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि उद्योग को भारत सरकार पर भरोसा है और चल रही द्विपक्षीय व्यापार वार्ताओं से सकारात्मक समाधान निकलने की उम्मीद है।


सूरत पर वैश्विक हालात का असर

सूरत पर वैश्विक हालात का असर


देश का प्रमुख हीरा प्रसंस्करण केंद्र सूरत भी लगातार चुनौतियों का सामना कर रहा है। वैश्विक स्तर पर बिकने वाले हर दस हीरों में से लगभग आठ का प्रसंस्करण सूरत में होता है। इसके बावजूद, आपूर्ति श्रृंखला में रुकावट, मांग में गिरावट और रूसी कच्चे पत्थरों से बने पॉलिश हीरों पर अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों ने उद्योग को प्रभावित किया है। ये रूसी पत्थर सूरत की कुल आपूर्ति का लगभग 33 प्रतिशत हिस्सा हैं। इसके चलते कई कारखानों में कामकाज धीमा पड़ा है और रोजगार में भी कटौती देखने को मिली है।


आभूषण निर्यात में वृद्धि

जीजेईपीसी ने बताया कि हीरों के निर्यात में आई गिरावट की भरपाई आभूषण निर्यात में हुई बढ़ोतरी से हो गई। सोने, चांदी और प्लैटिनम के आभूषणों की मांग बेहतर रही, जिससे कटे और पॉलिश किए गए हीरों और लैब में उगाए गए हीरों के कमजोर प्रदर्शन का असर संतुलित हो सका।


वैकल्पिक बाजारों का सहारा

वैकल्पिक बाजार बने सहारा


अमेरिका में गिरावट के बावजूद अन्य देशों को निर्यात ने व्यापार को सहारा दिया। संयुक्त अरब अमीरात को निर्यात में सालाना आधार पर 28 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और यह 6.89 अरब डॉलर तक पहुंच गया। हांगकांग को निर्यात भी 28 प्रतिशत बढ़कर 4.25 अरब डॉलर रहा, जबकि ऑस्ट्रेलिया को निर्यात में करीब 40 प्रतिशत की तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह 277.76 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया।


मुक्त व्यापार समझौतों से उम्मीद

मुक्त व्यापार समझौतों से उम्मीद


किरित भंसाली ने कहा कि यूएई और ऑस्ट्रेलिया के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौते उद्योग के लिए बेहद अहम समय पर आए हैं। इसके अलावा ब्रिटेन, ओमान, न्यूजीलैंड और अन्य देशों के साथ हुए या प्रस्तावित समझौते शुल्क कम करने और व्यापार बाधाएं घटाने में मदद करेंगे। उनका कहना है कि इन समझौतों से नए बाजार खुलेंगे और वैश्विक स्तर पर भारत की स्थिति और मजबूत होगी।