भारत के बुनियादी ढांचे में आपदा जोखिम प्रबंधन की कमी पर रिपोर्ट
आपदा जोखिम प्रबंधन की आवश्यकता
भारत के सड़क, रेलवे और बिजली क्षेत्रों में मौजूदा नीतियों और संविदा दस्तावेजों में आपदा जोखिम से निपटने के उपायों की कमी पाई गई है। एक नई रिपोर्ट में यह चिंता व्यक्त की गई है। यह समस्या गंभीर है, क्योंकि भारत और अन्य देशों को जलवायु परिवर्तन और आपदा जोखिमों के कारण वित्तीय खतरों का सामना करना पड़ रहा है। रिपोर्ट में वैश्विक बुनियादी ढांचे को हर साल 845 अरब डॉलर का नुकसान होने का अनुमान लगाया गया है, जबकि वास्तविक नुकसान इससे कहीं अधिक हो सकता है।
सीडीआरआई की रिपोर्ट का महत्व
कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर (सीडीआरआई) द्वारा जारी की गई इस रिपोर्ट का शीर्षक है 'भारत में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में आपदा के दौरान मजबूत बने रहने के उपायों को मुख्यधारा में लाना'। सीडीआरआई के महानिदेशक अमित प्रोथी ने एक बयान में कहा कि आपदा अनुकूलन का मतलब है सार्वजनिक वित्त की सुरक्षा करना और विकास के लाभों को बनाए रखना।
मजबूत बुनियादी ढांचे में निवेश
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि आज मजबूत बुनियादी ढांचे में निवेश करना भविष्य में वित्तीय झटकों को कम करने का एक प्रभावी तरीका है। यह सरकारों द्वारा किया जाने वाला एक महत्वपूर्ण निवेश है। सड़क, रेलवे और बिजली क्षेत्रों में कई प्रमुख कमी वाले क्षेत्रों की पहचान की गई है, जैसे कि मानक संविदात्मक दस्तावेजों में कमियां, परियोजना काल में कमियां, डेटा और जोखिम मूल्यांकन प्रणालियों में कमियां, क्षमता में कमी, और वित्तपोषण एवं जोखिम कवरेज में कमियां।
