भारत के विकसित होने का संकल्प: 2047 तक की चुनौतियाँ और संभावनाएँ
विकसित भारत का संकल्प
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 21 मई को मंत्रिपरिषद की बैठक में कहा कि भारत के विकसित होने में अभी 21 साल का समय शेष है। यह केवल एक वादा नहीं, बल्कि एक दृढ़ संकल्प है। भाजपा के नेता इस संकल्प को हर बात में शामिल कर रहे हैं, यहां तक कि भोजन करते समय भी।
जनगणना के संदर्भ में, यह ध्यान देने योग्य है कि अंग्रेजों के समय से हर 10 साल में जनगणना होती थी, लेकिन वर्तमान सरकार ने 15 साल बाद जनगणना कराने का निर्णय लिया है।
विकसित भारत का संकल्प एक बड़ा लक्ष्य है, और यह आवश्यक है कि सरकार स्पष्ट रूप से बताए कि 2047 में भारत का क्या स्वरूप होगा।
भारत की प्रति व्यक्ति आय वर्तमान में 2800 डॉलर के आसपास है, जबकि विकसित देशों की आय इससे कहीं अधिक है। उदाहरण के लिए, ब्रिटेन की प्रति व्यक्ति आय 60,000 डॉलर है।
भारत की अर्थव्यवस्था वर्तमान में 4 ट्रिलियन डॉलर की है, जबकि चीन और अमेरिका की अर्थव्यवस्थाएँ क्रमशः 20 और 30 ट्रिलियन डॉलर की हैं। 2047 में भारत का आर्थिक आकार क्या होगा, यह भी एक महत्वपूर्ण प्रश्न है।
विकसित होने का एक मानक प्रदूषण और वायु गुणवत्ता है। भारत में औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स 150 के करीब है, जबकि जापान में यह 40 से 60 के बीच होता है।
किसान परिवारों की आय में भी बड़ा अंतर है। भारत में यह आय 1.5 लाख रुपए सालाना है, जबकि जापान में यह 40 से 45 लाख रुपए है।
भारत के विकसित होने के लिए कई मानकों पर स्पष्टता आवश्यक है, जैसे स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, शिक्षा का स्तर, और नागरिकों की खुशहाली।
विकसित भारत की अवधारणा को स्पष्ट करने की आवश्यकता है, ताकि 2047 में हम सही तरीके से इसका आकलन कर सकें।
