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भारत के शेयर बाजार में गिरावट: पश्चिम एशिया के तनाव का प्रभाव

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर भारतीय शेयर बाजार पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। शुक्रवार को सेंसेक्स में 1,097 अंक की गिरावट आई, जबकि निफ्टी भी नीचे आया। वैश्विक बाजारों में कमजोरी और तेल की कीमतों में वृद्धि ने निवेशकों की चिंताओं को बढ़ा दिया है। भारतीय रुपये पर भी दबाव है, और बाजार में अस्थिरता का स्तर बढ़ गया है। जानें इस स्थिति के पीछे के कारण और विशेषज्ञों की राय।
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भारत के शेयर बाजार में गिरावट: पश्चिम एशिया के तनाव का प्रभाव

भारतीय बाजार पर वैश्विक तनाव का असर

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का प्रभाव अब वैश्विक बाजारों के साथ-साथ भारत के शेयर बाजार पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। शुक्रवार को कारोबार के दौरान निवेशकों की सतर्कता के चलते भारतीय बाजार में भारी गिरावट आई। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते टकराव और खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता ने निवेशकों की चिंताओं को बढ़ा दिया है।


सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट

शुक्रवार को कारोबार समाप्त होने तक बंबई शेयर बाजार का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स लगभग 1,097 अंक गिरकर 78,918 के स्तर पर बंद हुआ। इसी तरह, राष्ट्रीय शेयर बाजार का निफ्टी सूचकांक भी करीब 315 अंक नीचे आया। यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब एक दिन पहले बाजार में थोड़ी सुधार की स्थिति देखी गई थी।


वैश्विक बाजारों में कमजोरी

वैश्विक बाजारों में भी कमजोरी का माहौल बना हुआ है। अमेरिका के प्रमुख शेयर सूचकांकों में भी गिरावट दर्ज की गई है। औद्योगिक सूचकांक लगभग 785 अंक गिरा, जबकि अन्य प्रमुख सूचकांकों में भी गिरावट देखने को मिली। इसका असर एशियाई बाजारों पर भी पड़ा है, जिससे क्षेत्रीय शेयर बाजारों में कमजोरी का रुख दिखाई दिया।


तेल की कीमतों में वृद्धि

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण तेल आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत 85 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है, जबकि अमेरिकी कच्चे तेल की कीमत भी 81 डॉलर प्रति बैरल के आसपास है।


समुद्री परिवहन पर असर

होरमुज़ जलडमरूमध्य के आसपास समुद्री परिवहन में बाधाओं की खबरों ने भी बाजार की चिंताओं को बढ़ा दिया है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के तेल और गैस आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, इसलिए वहां किसी भी प्रकार की बाधा का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।


भारतीय रुपये पर दबाव

भारतीय रुपया भी दबाव में है। रिपोर्ट्स के अनुसार, रुपये को स्थिर रखने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक को इस सप्ताह लगभग 12 अरब डॉलर तक बाजार में हस्तक्षेप करना पड़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया का तनाव जारी रहता है, तो भारतीय मुद्रा और बाजार दोनों पर दबाव बना रह सकता है।


बाजार के विभिन्न क्षेत्रों का प्रदर्शन

बाजार में विभिन्न क्षेत्रों के प्रदर्शन की बात करें तो रियल एस्टेट क्षेत्र सबसे कमजोर रहा है, जिसमें लगभग दो प्रतिशत तक गिरावट आई है। कई प्रमुख कंपनियों के शेयरों में भी गिरावट देखने को मिली है, जिनमें इंडिगो, आईसीआईसीआई बैंक और लार्सन एंड टुब्रो जैसे बड़े नाम शामिल हैं।


कुछ क्षेत्रों में तेजी

हालांकि, बाजार की कमजोरी के बीच कुछ क्षेत्रों में तेजी भी देखी गई है। रक्षा क्षेत्र की कंपनियों के शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है, जिसमें लगभग नौ प्रतिशत तक की तेजी दर्ज की गई है। इसके अलावा, कुछ सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की कंपनियों के शेयर भी चर्चा में रहे हैं।


बाजार में अस्थिरता

बाजार में अस्थिरता का स्तर भी बढ़ गया है। राष्ट्रीय शेयर बाजार का अस्थिरता सूचकांक दिन के कारोबार में आठ प्रतिशत से अधिक बढ़ गया है, जो निवेशकों की बढ़ती चिंता को दर्शाता है।


सरकार की प्रतिक्रिया

सरकार भी हालात पर नजर बनाए हुए है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री ने जहाजरानी मंत्रालय और संबंधित कंपनियों के साथ बैठक कर पश्चिम एशिया में तनाव के कारण फंसे माल को निकालने के उपायों पर चर्चा की।


विशेषज्ञों की राय

विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया का संघर्ष समाप्त नहीं होता, तब तक वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, और इसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखाई देगा।