भारत को पीछे छोड़ ताइवान बना दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा शेयर बाजार
वैश्विक शेयर बाजारों में एआई का प्रभाव
दुनिया भर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की बढ़ती प्रतिस्पर्धा का असर वैश्विक शेयर बाजारों पर स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। इस संदर्भ में, भारत के लिए एक महत्वपूर्ण आर्थिक खबर आई है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, ताइवान ने भारत को पीछे छोड़ते हुए दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा शेयर बाजार बनने का स्थान प्राप्त कर लिया है, जबकि भारत अब छठे स्थान पर आ गया है।
ताइवान की बाजार पूंजी में वृद्धि
इस बदलाव का मुख्य कारण एआई और सेमीकंडक्टर कंपनियों में भारी निवेश बताया जा रहा है। ताइवान की बाजार पूंजी इस वर्ष लगभग पचास प्रतिशत बढ़कर लगभग पांच लाख करोड़ डॉलर तक पहुंच गई है। इसके विपरीत, भारत की बाजार पूंजी में लगभग सात प्रतिशत की कमी आई है, जो अब लगभग चार लाख बानवे हजार करोड़ डॉलर रह गई है।
चिप निर्माताओं में उछाल
एआई तकनीक की बढ़ती मांग के कारण चिप बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में तेजी आई है। विश्व की प्रमुख चिप निर्माता कंपनी एनवीडिया की बाजार कीमत लगभग पांच लाख बीस हजार करोड़ डॉलर आंकी गई है, जो भारत की सभी सूचीबद्ध कंपनियों की कुल बाजार कीमत से भी अधिक है।
दक्षिण कोरिया की तेजी
दक्षिण कोरिया भी तेजी से भारत के करीब पहुंच रहा है। वहां की बाजार पूंजी इस वर्ष लगभग सत्तर प्रतिशत बढ़ी है और अब वह भारत से केवल आठ प्रतिशत पीछे है। दक्षिण कोरिया की प्रमुख तकनीकी कंपनियां, जैसे सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स और एसके हाइनिक्स, एआई से जुड़ी वृद्धि का लाभ उठा रही हैं।
विदेशी निवेशकों की रुचि
विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी निवेशक अब उन देशों की ओर अधिक आकर्षित हो रहे हैं, जहां एआई, डेटा सेंटर और सेमीकंडक्टर उद्योग तेजी से विकसित हो रहे हैं। इस कारण दक्षिण कोरिया और ताइवान में विदेशी निवेश में वृद्धि हुई है, जबकि भारत से इस वर्ष अब तक बीस अरब डॉलर से अधिक की विदेशी निकासी हो चुकी है।
भविष्य की संभावनाएं
एलारा कैपिटल की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अप्रैल 2025 के बाद विदेशी निवेशक एआई क्षेत्र में अवसरों की तलाश में दक्षिण कोरिया और ताइवान का रुख कर रहे हैं। वहीं, ब्राजील को कमोडिटी बाजार में तेजी का लाभ मिला है, जिसका असर भारत और चीन जैसे बाजारों पर पड़ा है।
भारत की स्थिति
कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के सीईओ प्रतीक गुप्ता के अनुसार, वर्तमान में भारत को एआई आधारित बाजार के रूप में नहीं देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर और एआई आपूर्ति श्रृंखला में अभी तक मजबूत भूमिका नहीं निभा पा रहा है। इसके अलावा, विदेशी निवेशकों को भारत में पूंजीगत लाभ कर और रुपये की कमजोरी की चिंता भी बनी हुई है।
जोखिम और संभावनाएं
हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे बाजारों में जोखिम भी बढ़ रहा है, क्योंकि वहां कुछ गिनी-चुनी कंपनियों पर बाजार काफी निर्भर हो गया है। उदाहरण के लिए, टीएसएमसी अकेले ताइवान के बाजार मूल्य का एक बड़ा हिस्सा रखती है। जबकि भारत का बाजार अपेक्षाकृत बड़ा माना जाता है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज की स्थिति
भारत की सबसे मूल्यवान कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज देश की कुल बाजार पूंजी का केवल चार प्रतिशत हिस्सा रखती है। इसके बावजूद, एआई आधारित कंपनियों में तेजी के चलते निवेशकों का झुकाव ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे बाजारों की ओर बना हुआ है।
