भारत ने ईरान से 40 लाख बैरल कच्चा तेल आयात किया
भारत की ऊर्जा स्थिति में सुधार
अमेरिका की अस्थाई छूट के बाद भारत ने ईरान से कच्चा तेल मंगाया
वर्तमान वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच, भारत ने अपनी ऊर्जा स्थिति को मजबूत किया है। हाल ही में, भारत ने होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से आठ जहाजों के जरिए एलपीजी और कच्चा तेल आयात किया है। इसके साथ ही, ईरान से दो बड़े जहाज 40 लाख बैरल कच्चा तेल लेकर भारत के बंदरगाह पर पहुंच चुके हैं। यह ध्यान देने योग्य है कि अमेरिका द्वारा दी गई अस्थाई छूट के बाद, भारत ने सात साल में पहली बार ईरान से कच्चा तेल आयात किया है।
विशाल क्रूड कैरियर का आगमन
शिप-ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, नेशनल ईरानी टैंकर कंपनी द्वारा संचालित 'फेलिसिटी' नामक एक बड़ा क्रूड कैरियर रविवार रात गुजरात के सिक्का तट पर लंगर डाले हुए है। इस जहाज में लगभग 20 लाख बैरल कच्चा तेल है, जिसे मार्च के मध्य में ईरान के खार्ग द्वीप से लोड किया गया था। इसी समय, दूसरा टैंकर 'जया' ओडिशा के पारादीप तट के पास खड़ा है, जिसमें समान मात्रा में तेल है।
अमेरिकी प्रतिबंधों की छूट की अवधि
अमेरिकी प्रतिबंधों से मिली इस छूट की अवधि 19 अप्रैल को समाप्त हो रही है। अनुमान है कि वर्तमान में लगभग 95 मिलियन बैरल ईरानी तेल समुद्र में मौजूद जहाजों पर है। इनमें से लगभग 51 मिलियन बैरल भारत को बेचा जा सकता है, जबकि शेष तेल चीन और दक्षिण पूर्व एशियाई खरीदारों के लिए उपलब्ध है। हालांकि, शांति वार्ता विफल होने के बाद अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी की चेतावनी दी है, जिससे यह स्पष्ट है कि यह आपूर्ति लंबे समय तक नहीं चलने वाली है।
भारत में तेल और गैस की स्थिति
दुनिया भर में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के बीच, भारत सरकार ने आम जनता को राहत दी है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कहा है कि देश में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस (एलपीजी) की आपूर्ति सामान्य है। मंत्रालय के अनुसार, सभी तेल रिफाइनरियां अपनी पूरी क्षमता से काम कर रही हैं और सरकार के पास कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार है।
तेल की कीमतों में स्थिरता
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतों में वृद्धि का असर आम जनता पर न पड़े, इसके लिए भारत सरकार ने कई कदम उठाए हैं। सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की है। इसके अलावा, घरेलू उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए निर्यात पर सख्ती बढ़ाई गई है। 11 अप्रैल 2026 को जारी अधिसूचना के अनुसार, डीजल के निर्यात पर लेवी बढ़ाकर 55.50 रुपये और हवाई ईंधन पर 42 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है।
आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति
सरकार ने आम घरों की जरूरतों को देखते हुए रिफाइनरियों से एलपीजी का उत्पादन बढ़ा दिया है। इसके अतिरिक्त, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नियमित कोटे से अलग 48,000 किलोलीटर केरोसिन का अतिरिक्त आवंटन किया गया है। दवा, खाद्य वितरण और रसायन जैसे महत्वपूर्ण उद्योगों को भी रोजाना 800 मीट्रिक टन सी3 और सी4 स्ट्रीम की आपूर्ति सुनिश्चित की गई है।
