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भारत ने ईरान से रसोई गैस की खरीद शुरू की, वैश्विक आपूर्ति संकट के बीच

भारत ने लगभग आठ साल बाद ईरान से रसोई गैस की खरीद शुरू की है, जो वैश्विक आपूर्ति संकट के बीच एक महत्वपूर्ण कदम है। यह निर्णय उस समय लिया गया है जब देश में गैस की उपलब्धता पर दबाव बढ़ रहा है। इस लेख में जानें कि यह खरीद कैसे संभव हुई और इसके पीछे के कारण क्या हैं।
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भारत ने ईरान से रसोई गैस की खरीद शुरू की, वैश्विक आपूर्ति संकट के बीच

भारत की ईरान से रसोई गैस खरीद

भारत ने पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और आपूर्ति में रुकावटों के बीच लगभग आठ साल बाद ईरान से रसोई गैस खरीदने का निर्णय लिया है। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन ने यह गैस खरीदी है, जिसे अन्य सरकारी कंपनियों के साथ साझा किया जाएगा।




यह खरीद ऐसे समय में की गई है जब वैश्विक स्तर पर आपूर्ति में बाधा के कारण देश में रसोई गैस की उपलब्धता पर दबाव बढ़ गया है। सूत्रों के अनुसार, इस खेप का उपयोग भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड के साथ मिलकर किया जाएगा।




सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, यह खेप लगभग 43 हजार टन गैस का मिश्रण है, जिसमें ब्यूटेन और प्रोपेन शामिल हैं। यह मात्रा भारत की कुल मांग के मुकाबले बहुत सीमित मानी जा रही है, और यह केवल आधे दिन की जरूरत को ही पूरा कर सकती है।




भारत अपनी रसोई गैस की आवश्यकताओं का एक बड़ा हिस्सा आयात पर निर्भर करता है, जिसमें अधिकांश आपूर्ति पश्चिम एशिया से आती है। हाल के घटनाक्रमों के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य पर प्रभाव पड़ा है, जिससे आपूर्ति श्रृंखला में बाधा आई है।




कई क्षेत्रों में गैस की कमी के कारण लोग वैकल्पिक साधनों का सहारा ले रहे हैं, और कुछ स्थानों पर सिलेंडर के लिए लंबी कतारें भी देखी गई हैं। सरकार ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए होटल और व्यावसायिक उपयोग पर आंशिक रोक लगाने का निर्णय लिया है और प्राकृतिक गैस पाइपलाइन के विस्तार को तेज करने के निर्देश दिए हैं।




यह खरीद तब संभव हो पाई है जब अमेरिका ने कुछ शर्तों के साथ ईरान से ऊर्जा आयात की अनुमति दी है। इससे पहले कड़े प्रतिबंधों के कारण यह व्यापार लंबे समय तक रुका हुआ था।




सूत्रों के अनुसार, गैस लेकर आ रहा जहाज भारत के तटीय क्षेत्र की ओर बढ़ रहा है और आने वाले दिनों में यह देश के दक्षिणी बंदरगाह पर पहुंच सकता है। इसके साथ ही, भारत दो अन्य गैस खेपों के सुरक्षित मार्ग को लेकर भी बातचीत के अंतिम चरण में है।