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भारत में ईंधन की कीमतों में कमी की संभावना, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव

पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष ने वैश्विक तेल बाजार को प्रभावित किया है, जिससे भारत में ईंधन की कीमतों में कमी की संभावना बढ़ गई है। सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती की है, जिससे उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है। हालांकि, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और वैश्विक आपूर्ति की अनिश्चितता बाजार के लिए चुनौती बनी हुई है। जानें इस स्थिति का विस्तृत विश्लेषण।
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भारत में ईंधन की कीमतों में कमी की संभावना, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव

पश्चिम एशिया में संघर्ष का असर


नई दिल्ली: अमेरिका और इजरायल तथा ईरान के बीच चल रहे संघर्ष ने वैश्विक तेल बाजार को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है, जिसका सीधा असर भारत की ईंधन कंपनियों पर पड़ा है। इस स्थिति में, सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी में महत्वपूर्ण कटौती की है। इससे देशभर में ईंधन की कीमतों में कमी की उम्मीद जगी है। हालांकि, वैश्विक आपूर्ति की अनिश्चितता बाजार के लिए एक चुनौती बनी हुई है।


एक्साइज ड्यूटी में कमी

सरकार ने पेट्रोल पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी को 13 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 3 रुपये कर दिया है। वहीं, डीजल पर यह ड्यूटी 10 रुपये प्रति लीटर से समाप्त कर दी गई है। इस कटौती से आम उपभोक्ताओं को जल्द राहत मिलने की संभावना है। सरकारी अनुमान है कि कंपनियां इस कमी को कीमतों में शामिल करेंगी, जिससे पंपों पर दरें घटेंगी।


कच्चे तेल की कीमतों का दबाव

पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित हुई है, जिससे कीमतों में तेज वृद्धि देखी गई है। हाल ही में ब्रेंट फ्यूचर्स में 5.7% और वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट में 4.6% की बढ़ोतरी हुई थी। महंगे कच्चे तेल की खरीद ने भारतीय ईंधन कंपनियों पर भारी दबाव डाला है, जिसके कारण कुछ निजी कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाए हैं।


सरकारी और निजी कंपनियों की स्थिति

नायरा एनर्जी ने पेट्रोल के दाम 5 रुपये और डीजल के दाम 3 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ा दिए हैं। हालांकि, सरकारी कंपनियों जैसे इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने सामान्य पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़ाए हैं। लेकिन प्रीमियम पेट्रोल और औद्योगिक डीजल की कीमतें बढ़ गई हैं। इन सरकारी कंपनियों के पास देश का लगभग 90% ईंधन बाजार है।


अंतरराष्ट्रीय बाजार में गिरावट

ईरान के ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमलों को 10 दिनों के लिए रोकने के निर्णय के बाद कच्चे तेल में हल्की गिरावट आई है। ब्रेंट फ्यूचर्स 0.8% गिरकर 107.11 डॉलर प्रति बैरल और WTI 93.65 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि जब तक संघर्ष जारी रहेगा, कीमतें अस्थिर रह सकती हैं।


भारत की तेल निर्भरता

भारत अपनी तेल जरूरतों का 88% आयात करता है, जिसमें से अधिकांश मात्रा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरती है। संघर्ष के बढ़ने के बाद, ईरान ने इस मार्ग पर नियंत्रण मजबूत कर दिया है और व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही को सीमित कर दिया है। हालांकि, उसने भारत जैसे 'फ्रेंडली देशों' के लिए कुछ शर्तों के साथ रास्ता खोलने की बात कही है, जिससे बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।