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भारत में ईंधन संकट: मिडिल ईस्ट तनाव का असर

मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव का असर भारत में ईंधन संकट के रूप में देखने को मिल रहा है। प्रधानमंत्री मोदी की अपील के बाद केंद्रीय मंत्रियों ने अपने काफिले की गाड़ियों की संख्या कम की है। RBI के गवर्नर ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि के संकेत दिए हैं, जिससे महंगाई की समस्या बढ़ने की संभावना है। जानें इस संकट का भारत पर क्या प्रभाव पड़ सकता है और आगे की स्थिति क्या होगी।
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भारत में ईंधन संकट: मिडिल ईस्ट तनाव का असर

भारत में ईंधन संकट की स्थिति


नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव का प्रभाव वैश्विक स्तर पर महसूस किया जा रहा है। होर्मुज स्ट्रेट, जो तेल टैंकरों और एलपीजी कार्गो के लिए महत्वपूर्ण है, वहां जहाजों का आवागमन बहुत सीमित हो गया है, जिससे कई देशों में ईंधन की कमी उत्पन्न हो रही है। भारत में भी इस स्थिति का असर स्पष्ट है।


प्रधानमंत्री मोदी द्वारा ईंधन बचाने की अपील के बाद, केंद्रीय मंत्रियों ने अपने काफिले की गाड़ियों की संख्या कम कर दी है। विभिन्न राज्यों ने ईंधन की खपत में कमी लाने के लिए निर्देश जारी किए हैं। इस बीच, RBI के गवर्नर ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि के संकेत दिए हैं, जिससे महंगाई की समस्या बढ़ने की संभावना है। इससे पहले, सरकार ने कमर्शियल गैस सिलिंडर की कीमतों में भी वृद्धि की थी।


'सरकार लंबे समय तक तेल कीमतों का बोझ नहीं उठा सकती'

वास्तव में, वैश्विक तेल संकट से भारत भी प्रभावित हो रहा है। RBI के गवर्नर ने ज्यूरिख में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और स्विस नेशनल बैंक द्वारा आयोजित सम्मेलन में कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है, जिसका बोझ सरकार ने अब तक उठाया है। यदि यह वैश्विक समस्या लंबे समय तक जारी रहती है, तो आम उपभोक्ताओं को ईंधन की बढ़ी हुई कीमतों का सामना करना पड़ सकता है।


हालांकि, इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि हुई है, लेकिन भारत सरकार ने अभी तक आम जनता को राहत देते हुए पेट्रोल-डीजल की कीमतें नहीं बढ़ाई हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इससे तेल कंपनियों को प्रतिदिन करोड़ों का नुकसान हो रहा है। यदि युद्ध लंबे समय तक चलता है और होर्मुज पर कोई समाधान नहीं निकलता है, तो स्थिति और बिगड़ सकती है।


US-ईरान के बीच तनाव की स्थिति

यह ध्यान देने योग्य है कि 27 फरवरी को अमेरिका ने ईरान पर हमला किया था, जिसके बाद से दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया है। युद्धविराम पर सहमति बनाने की कोशिशें हुई हैं, लेकिन ये प्रयास सफल नहीं हो रहे हैं। पाकिस्तान जैसे देश भी इस मामले में मध्यस्थता करने की कोशिश कर चुके हैं, लेकिन निराशा ही हाथ लगी है।