भारत में एआई सम्मेलन 2026: वैश्विक सहयोग की नई दिशा
इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 का समापन नई दिल्ली में हुआ, जिसमें 88 देशों ने ‘नई दिल्ली घोषणा-पत्र’ का समर्थन किया। सम्मेलन ने भारत को वैश्विक एआई विमर्श में एक महत्वपूर्ण भूमिका में स्थापित किया, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल एक राजनीतिक बयान है। अमेरिका और चीन की भूमिका पर चर्चा के बीच, एआई गवर्नेंस के ठोस नियमों की आवश्यकता बनी हुई है। क्या यह सम्मेलन भविष्य में ठोस वैश्विक ढांचे में परिवर्तित होगा? जानें इस लेख में।
| Feb 24, 2026, 23:22 IST
इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 का समापन
21 फरवरी को नई दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 का समापन हुआ, जिसे आयोजकों ने ऐतिहासिक और विश्व का सबसे बड़ा एआई सम्मेलन बताया। यह छह दिवसीय कार्यक्रम 16 फरवरी से भारत मंडपम में शुरू हुआ, जिसमें विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्ष, प्रमुख वैश्विक तकनीकी कंपनियों के नेता और हजारों प्रतिनिधि शामिल हुए।
भारत की एआई स्थिति और सम्मेलन के परिणाम
हालांकि भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में अमेरिका और चीन जैसे देशों से पीछे है, फिर भी इस स्तर पर सम्मेलन का आयोजन एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। समिट के परिणाम मिश्रित रहे।
नई दिल्ली घोषणा-पत्र का महत्व
इस सम्मेलन का सबसे महत्वपूर्ण परिणाम ‘नई दिल्ली घोषणा-पत्र’ था, जिसे 88 देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने समर्थन दिया। इसमें अमेरिका, चीन, रूस, यूनाइटेड किंगडम और फ्रांस जैसी प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं शामिल थीं। पिछले एआई एक्शन समिट में 61 हस्ताक्षरकर्ता थे, इसलिए इस बार की संख्या एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि मानी जा रही है।
भारत की सफलता और विशेषज्ञों की राय
केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस व्यापक समर्थन को भारत की बड़ी सफलता बताया। घोषणा-पत्र में सहयोगात्मक, भरोसेमंद और समावेशी एआई के दृष्टिकोण पर जोर दिया गया है।
विशेषज्ञों की चिंताएं
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह दस्तावेज़ मुख्यतः एक राजनीतिक बयान है और इसमें किसी भी बाध्यकारी व्यवस्था का प्रावधान नहीं है। अमेरिका के वरिष्ठ अधिकारी माइकल क्रात्सियोस ने स्पष्ट किया कि वॉशिंगटन वैश्विक एआई गवर्नेंस के विचार को खारिज करता है।
चीन की भूमिका और भविष्य की संभावनाएं
चीन, जो एआई क्षेत्र में दूसरी सबसे बड़ी ताकत है, औपचारिक रूप से प्रक्रिया का हिस्सा रहा, लेकिन उसकी सक्रिय भागीदारी सीमित रही। यह सवाल बना हुआ है कि क्या यह घोषणा भविष्य में किसी ठोस वैश्विक ढांचे में परिवर्तित होगी।
भारत की भूमिका और चुनौतियाँ
कुल मिलाकर, समिट ने भारत को वैश्विक एआई विमर्श में एक ‘कन्वीनिंग पावर’ के रूप में स्थापित किया है और निवेश प्रतिबद्धताओं के संकेत भी मिले हैं। हालांकि, एआई गवर्नेंस के ठोस नियमों और महाशक्तियों के बीच सहमति के बिना आगे का रास्ता चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
