Newzfatafatlogo

भारत में काम के घंटे और कमाई में गिरावट: एक नई रिपोर्ट का विश्लेषण

हाल ही में आई एक रिपोर्ट में बताया गया है कि कोरोना महामारी के बाद भारत में काम के घंटे और कमाई में गिरावट आई है। पीरियॉडिक लेबर फोर्स सर्वे के अनुसार, लोग अब पहले की तुलना में कम घंटे काम कर रहे हैं, जिससे उनकी आय भी प्रभावित हुई है। रिपोर्ट में यह भी दर्शाया गया है कि स्व-नियोजित और घरेलू उद्योगों में कार्यरत लोगों की स्थिति में बदलाव आया है। जानें इस रिपोर्ट में और क्या जानकारी दी गई है और इसके पीछे के कारण क्या हैं।
 | 
भारत में काम के घंटे और कमाई में गिरावट: एक नई रिपोर्ट का विश्लेषण

काम के घंटे में कमी

भारत में कार्य घंटों पर अक्सर चर्चा होती है। यहां काम करने वाले लोगों को अमेरिका और यूरोप की तुलना में कम वेतन मिलता है। हाल ही में आई एक रिपोर्ट में बताया गया है कि कोरोना महामारी के बाद भारत में रोजगार की स्थिति में कमी आई है, जिससे लोगों की आय भी घट गई है। इसके परिणामस्वरूप, काम के घंटे भी कम हो गए हैं। पीरियॉडिक लेबर फोर्स सर्वे के अनुसार, महामारी से पहले जो लोग प्रति सप्ताह 49.6 घंटे काम कर रहे थे, अब वे केवल 39.6 घंटे काम कर रहे हैं, जो कि 10 घंटे की कमी है.


वर्कफोर्स में बदलाव

रिपोर्ट के अनुसार, स्व-नियोजित और घरेलू उद्योगों में कार्यरत लोग कुल कार्यबल का 56 प्रतिशत हिस्सा बनाते हैं। यदि हम उनके कार्य घंटों की तुलना करें, तो जुलाई 2018 से जून 2019 के बीच जो लोग प्रति सप्ताह 46.6 घंटे काम कर रहे थे, वे जनवरी 2025 से दिसंबर 2025 के बीच केवल 39.6 घंटे काम कर रहे हैं.


कमाई की स्थिति

कैजुअल श्रमिकों के लिए, पहले वे प्रति सप्ताह 43.1 घंटे काम करते थे, अब यह घटकर 41.2 घंटे रह गया है। वहीं, सैलरी क्लास के लोग जो पहले 50.2 घंटे काम कर रहे थे, अब 48.8 घंटे काम कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि काम के घंटों में कमी का अर्थ है कि कोरोना महामारी के बाद काम की मांग में कमी आई है.


भारत में कमाई की तुलना

IND Money की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में प्रति सप्ताह 46.7 घंटे काम करने वाले लोगों को औसतन 8,000 रुपये मिलते हैं। वहीं, चीन में 48.5 घंटे काम करने पर 68,423 रुपये, जापान में 40 घंटे काम करने पर 78,075 रुपये, जर्मनी में 40 घंटे के लिए 1,14,075 रुपये और अमेरिका में 34.2 घंटे काम करने पर 1,40,130 रुपये मिलते हैं.


कमाई में गिरावट

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 2018-19 की तुलना में 2025 में स्व-नियोजित लोगों की वास्तविक आय में थोड़ी वृद्धि हुई है, जो पहले 7,336 रुपये थी और अब 7,617 रुपये हो गई है। जबकि सैलरी वाले कर्मचारियों की आय में कमी आई है, जो पहले 11,634 रुपये थी और अब घटकर 11,289 रुपये हो गई है.


महिलाओं की स्थिति

आंकड़े दर्शाते हैं कि काम के घंटों में पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए कमी आई है। पुरुष पहले 48.9 घंटे काम करते थे, अब 45.9 घंटे कर रहे हैं। वहीं, महिलाएं जो पहले 39.4 घंटे काम कर रही थीं, अब केवल 34.1 घंटे काम कर रही हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के काम के घंटे में भी कमी आई है, जो पहले 38.2 घंटे थे, अब घटकर 32.6 घंटे रह गए हैं.


लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट

दिलचस्प बात यह है कि काम करने की इच्छा दर्शाने वाला लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट (LFPR) पिछले पांच वर्षों में 18.2 प्रतिशत से बढ़कर 34.6 प्रतिशत हो गया है.