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भारत में डीजल-पेट्रोल की कीमतें स्थिर, कंपनियों को हो रहा भारी नुकसान

भारत में डीजल और पेट्रोल की कीमतें पिछले चार वर्षों से स्थिर हैं, जबकि कंपनियों को प्रति लीटर पेट्रोल पर 20 रुपये और डीजल पर 100 रुपये का नुकसान हो रहा है। सरकार ने कीमतें बढ़ाने की कोई योजना नहीं बनाई है, और हाल ही में आई खबरों को भी गलत बताया है। जानें इस स्थिति के पीछे के कारण और सरकार की नीतियों का प्रभाव।
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भारत में डीजल-पेट्रोल की कीमतें स्थिर, कंपनियों को हो रहा भारी नुकसान

भारत में तेल की कीमतों की स्थिरता

ईरान और इजरायल के बीच तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य लंबे समय तक बंद रहा, जिससे तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई। इसके बावजूद, भारत में डीजल और पेट्रोल की कीमतें नहीं बढ़ीं। जबकि कई देशों में इन पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें आसमान छू रही हैं, भारत में स्थिति अलग है। सरकार ने खुलासा किया है कि तेल कंपनियों को एक लीटर पेट्रोल पर 20 रुपये और डीजल पर 100 रुपये का नुकसान हो रहा है। यह स्थिति दिलचस्प है, क्योंकि अधिकांश राज्यों में डीजल की कीमत 90 रुपये से कम है, जबकि कंपनियों को 100 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है.


पिछले चार वर्षों में स्थिर कीमतें

भारत में पिछले चार सालों से डीजल और पेट्रोल की कीमतों में कोई महत्वपूर्ण बदलाव नहीं आया है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि फिलहाल कीमतें बढ़ाने की कोई योजना नहीं है। हाल ही में, चुनावों के बाद तेल की कीमतों में संभावित वृद्धि के बारे में आई खबरों को भी सरकार ने गलत बताया है.


सरकार का बयान

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की ज्वाइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा ने पश्चिम एशिया में संकट के संदर्भ में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है, फिर भी सरकार ने कीमतें स्थिर रखने का प्रयास किया है। पिछले साल इसी समय कच्चा तेल 70 डॉलर प्रति बैरल था, जो अब 113 डॉलर हो गया है। भारत में अप्रैल 2022 से तेल की कीमतों में कोई कमी या वृद्धि नहीं हुई है.


भारत की तेल जरूरतें

भारत अपनी तेल जरूरतों का 88 प्रतिशत आयात करता है। सुजाता शर्मा ने बताया कि कच्चे तेल की महंगाई और घरेलू कीमतों की स्थिरता के कारण कंपनियों को प्रति लीटर पेट्रोल पर लगभग 20 रुपये और डीजल पर 100 रुपये का नुकसान हो रहा है। सरकार ने घरेलू आपूर्ति को बनाए रखने के लिए तेल के निर्यात पर अतिरिक्त कर लगाया है.


कंपनियों का नुकसान और मार्जिन

भारत सरकार ने एक नियम लागू किया है, जिसके तहत तेल कंपनियों को कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के समय कीमतें घटाने की आवश्यकता नहीं होती। यदि कच्चा तेल सस्ता होता है, तो कंपनियां पहले से अधिक लाभ कमा सकती हैं। पिछले 3-4 वर्षों में कई बार कच्चा तेल सस्ता होने के बावजूद कीमतें स्थिर रहीं, जिससे कंपनियों ने अच्छा मार्जिन कमाया। अब संकट के समय, कंपनियों का वही मार्जिन खर्च हो रहा है.


सरकार की राहत

सरकार ने कंपनियों को राहत देने के लिए डीजल और पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी घटाई थी। इससे आम जनता के लिए तेल की कीमतें कम नहीं हुईं, लेकिन कंपनियों को होने वाले नुकसान में थोड़ी कमी आई है.