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भारत में डीजल में आइसोब्यूटेनॉल मिश्रण अनिवार्य करने की योजना

भारत सरकार डीजल में आइसोब्यूटेनॉल के मिश्रण को अनिवार्य करने की योजना बना रही है, जो ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ाने और परिवहन क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मदद करेगा। इस पहल के तहत, मंत्रालय ने ईंधन मिश्रण कार्यक्रम को आगे बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए हैं, जिसमें ई85 और ई100 जैसे ईंधनों का विकास शामिल है। इसके अलावा, दिल्ली-एनसीआर में उन्नत यातायात प्रबंधन प्रणाली को लागू करने की प्रक्रिया भी जल्द शुरू होगी।
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भारत में डीजल में आइसोब्यूटेनॉल मिश्रण अनिवार्य करने की योजना

सरकार की नई पहल

देश में ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और परिवहन क्षेत्र से कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए, सरकार इस वर्ष के अंत तक डीजल में आइसोब्यूटेनॉल के मिश्रण को अनिवार्य करने का प्रस्ताव ला सकती है। शुक्रवार को एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी।


सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव वी उमाशंकर ने उद्योग मंडल सीआईआई के एक कार्यक्रम में कहा कि डीजल में मिश्रण को गंभीरता से लिया जा रहा है। भारत पेट्रोलियम इस दिशा में आइसोब्यूटेनॉल मिश्रण पर अनुसंधान कर रही है, जिसके परिणाम उत्साहजनक हैं।


डीजल की खपत और मिश्रण का महत्व

उमाशंकर ने बताया कि डीजल की खपत पेट्रोल की तुलना में लगभग दोगुनी है, जिससे इस ईंधन में मिश्रण का प्रभाव देश की ऊर्जा सुरक्षा पर और भी अधिक होगा। उन्होंने कहा कि इस वर्ष के अंत तक डीजल में मिश्रण को अनिवार्य करने का प्रावधान लागू होने की संभावना है।


उन्होंने यह भी बताया कि मंत्रालय पिछले 10-12 वर्षों में ईंधन मिश्रण कार्यक्रम को आगे बढ़ा रहा है, जिसमें ई85 पेट्रोल (85 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण वाला) और ई100 (लगभग शुद्ध एथेनॉल आधारित) से जुड़े वाहन विनिर्माण नियमों का मसौदा भी जारी किया गया है।


आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में कदम

उमाशंकर ने कहा कि भारत पहले ही पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य हासिल कर चुका है, जिससे आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने और उत्सर्जन घटाने में मदद मिली है।


उन्होंने यह भी बताया कि ई20 स्तर पर ब्लेंडिंग को लेकर कुछ चिंताएं रही हैं, लेकिन इस मामले में स्थिति अलग है क्योंकि ऐसे ईंधन के लिए वाहन अलग तरीके से बनाए जाएंगे।


भविष्य की योजनाएं

सचिव ने कहा कि मंत्रालय जल्द ही ट्रक और ट्रेलर को आपस में बदलकर उपयोग करने की सुविधा पर एक मसौदा अधिसूचना ला सकता है। इसका उद्देश्य ऐसा ढांचा विकसित करना है, जिससे इलेक्ट्रिक भारी वाणिज्यिक वाहनों के लिए बैटरी बदलने और चार्जिंग की व्यवस्था को बेहतर तरीके से लागू किया जा सके।


इसके अलावा, मंत्रालय टोल संग्रह की मल्टी-लेन फ्री फ्लो (एमएलएफएफ) व्यवस्था को देशभर में लागू करने की योजना बना रहा है, जिससे वाहनों को टोल प्लाजा पर रुकना नहीं पड़ेगा और टोल शुल्क इलेक्ट्रॉनिक तरीके से अपने-आप कट जाएगा।


दिल्ली-एनसीआर में यातायात प्रबंधन

उमाशंकर ने बताया कि दिल्ली-एनसीआर में उन्नत यातायात प्रबंधन प्रणाली के लिए प्रस्ताव को मंजूरी दी जा चुकी है और इसके क्रियान्वयन की प्रक्रिया जल्द शुरू होगी।