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भारत में बुजुर्गों की बढ़ती आर्थिक भूमिका: सिल्वर इकॉनमी का उदय

भारत में रिटायरमेंट के प्रति दृष्टिकोण में बदलाव आ रहा है, जहां बुजुर्ग अब केवल आराम करने के बजाय सक्रिय रूप से कमाई के नए अवसरों की तलाश कर रहे हैं। 'सिल्वर इकॉनमी' के तहत, 60 वर्ष से अधिक आयु के लोग अब एक महत्वपूर्ण उपभोक्ता वर्ग बन चुके हैं। इस लेख में जानें कि कैसे बुजुर्गों के लिए कंसल्टिंग, ऑनलाइन टीचिंग और फ्रीलांसिंग जैसे विकल्प उपलब्ध हैं, और सरकार की ओर से उन्हें मिलने वाले लाभों के बारे में भी जानकारी प्राप्त करें।
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भारत में बुजुर्गों की बढ़ती आर्थिक भूमिका: सिल्वर इकॉनमी का उदय

बुजुर्गों की नई आर्थिक पहचान

भारत में रिटायरमेंट के प्रति दृष्टिकोण में बदलाव आ रहा है। पहले यह माना जाता था कि 60 वर्ष की आयु के बाद व्यक्ति को केवल आराम करना चाहिए और बच्चों पर निर्भर रहना चाहिए, लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है। वर्तमान में, 60 वर्ष से अधिक आयु के लगभग 10 करोड़ लोग हैं, जो अब एक महत्वपूर्ण उपभोक्ता और आय अर्जित करने वाले वर्ग के रूप में उभर रहे हैं। इसे 'सिल्वर इकॉनमी' कहा जाता है, जिसमें बुजुर्गों की आवश्यकताएं, उनकी आय और उनके लिए उपलब्ध अवसर शामिल हैं। भारत की सिल्वर इकॉनमी वर्तमान में लगभग 73,000 करोड़ रुपये की है और भविष्य में यह कई गुना बढ़ने की संभावना है.


बुजुर्गों की संख्या में वृद्धि

हर दिन लगभग 19,500 लोग 60 वर्ष की आयु पार कर रहे हैं। 2050 तक, 60 वर्ष से अधिक आयु की जनसंख्या 34.7 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है, जो देश की कुल जनसंख्या का लगभग 21 प्रतिशत होगी। इसे कुछ विशेषज्ञ 'सिल्वर सुनामी' के रूप में भी संदर्भित कर रहे हैं। वर्तमान में, सीनियर केयर उद्योग का आकार 10 से 15 अरब डॉलर है, और अगले दशक में यह 30 से 50 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है.


रिटायरमेंट के बाद कमाई के विकल्प

अब रिटायरमेंट का मतलब केवल पेंशन और बचत पर निर्भर रहना नहीं है। कई रिटायर्ड लोग अब इंश्योरेंस एजेंट, फ्रीलांस कंसल्टेंट, ट्यूटर या पार्ट-टाइम कम्युनिटी वर्कर जैसे विकल्प चुन रहे हैं.


कंसल्टिंग और एडवाइजरी: यह उन लोगों के लिए एक बेहतरीन विकल्प है जिन्होंने किसी विशेष क्षेत्र में कई वर्षों तक काम किया है। फाइनेंस, कानून, शिक्षा और बिजनेस मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में सीनियर प्रोफेशनल्स की मांग होती है, क्योंकि उनका अनुभव नई पीढ़ी के लिए अनमोल होता है। कंसल्टिंग में काम के घंटे और क्लाइंट का चयन स्वयं किया जा सकता है.


ऑनलाइन टीचिंग और ट्यूटरिंग: यह एक और महत्वपूर्ण क्षेत्र है, जिसमें मैथ्स, साइंस, भाषाएं और प्रोफेशनल कोर्स जैसे विषयों में ऑनलाइन टीचर्स की हमेशा आवश्यकता होती है, और इसे घर से किया जा सकता है.


फ्रीलांसिंग: इस क्षेत्र में भी बुजुर्गों के लिए कई अवसर हैं, जैसे राइटिंग, एडिटिंग, ग्राफिक डिजाइन, ट्रांसलेशन और टैक्स कंसल्टिंग। Upwork, Fiverr जैसी वेबसाइटें और WisdomCircle जैसे भारतीय प्लेटफॉर्म विशेष रूप से रिटायर्ड प्रोफेशनल्स को कंपनियों से जोड़ते हैं.


हेल्थकेयर और टेक्नोलॉजी में अवसर

60 वर्ष से अधिक आयु के लोग भारत की फार्मा मार्केट में 17 प्रतिशत हिस्सेदारी रखते हैं, क्योंकि लगभग सभी सीनियर सिटीजन किसी न किसी दीर्घकालिक उपचार पर निर्भर होते हैं। यही कारण है कि हेल्थटेक, टेलीमेडिसिन और वेलनेस से जुड़े व्यवसाय तेजी से विकसित हो रहे हैं। भारत का टेलीमेडिसिन बाजार 2026 में 4.48 अरब डॉलर का होने का अनुमान है, और 2031 तक यह 12.63 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है.


सरकार की पहल

अटल पेंशन योजना के तहत 2019 में 1.5 करोड़ लोग जुड़े थे, जबकि 2025 तक यह संख्या 8.2 करोड़ से अधिक हो गई है, और इसका कुल एसेट बेस लगभग 49,000 करोड़ रुपये है। इसके अतिरिक्त, सरकार ने 70 वर्ष से अधिक आयु के सभी नागरिकों को आयुष्मान भारत के तहत 5 लाख रुपये तक का मुफ्त स्वास्थ्य बीमा प्रदान करने का निर्णय लिया है, जिससे लगभग 6 करोड़ बुजुर्गों को लाभ होगा.