भारत में बेरोजगारी दर में वृद्धि: ताजा आंकड़े चिंताजनक
बेरोजगारी की स्थिति में वृद्धि
भारत में बेरोजगारी एक बार फिर से बढ़ती हुई नजर आ रही है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा जारी किए गए हालिया श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) के अनुसार, मार्च 2026 में बेरोजगारी दर 5.1 प्रतिशत तक पहुंच गई, जबकि फरवरी में यह 4.9 प्रतिशत थी। यह आंकड़ा पिछले पांच महीनों में सबसे ऊंचा है। इससे पहले अक्टूबर 2025 में बेरोजगारी दर 5.2 प्रतिशत दर्ज की गई थी। मार्च में बेरोजगारी में वृद्धि का मुख्य कारण शहरी क्षेत्रों में बढ़ती बेरोजगारी बताई जा रही है।
शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी में वृद्धि
आंकड़ों के अनुसार, शहरी बेरोजगारी दर फरवरी में 6.6 प्रतिशत से बढ़कर मार्च में 6.8 प्रतिशत हो गई है। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी में मामूली वृद्धि देखी गई, जो 4.2 प्रतिशत से बढ़कर 4.3 प्रतिशत पर पहुंच गई। इसका मतलब है कि शहरी क्षेत्रों में रोजगार की स्थिति अधिक गंभीर हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि शहरी इलाकों में आर्थिक गतिविधियों में कमी और निजी क्षेत्र में नौकरियों की कमी के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा और अन्य रोजगार योजनाओं से कुछ हद तक सहायता मिलती रही है।
पुरुषों और महिलाओं में बेरोजगारी का बढ़ता स्तर
पुरुषों और महिलाओं की बेरोजगारी दर भी चिंताजनक है। मार्च में पुरुषों की बेरोजगारी दर 5 प्रतिशत तक पहुंच गई, जो फरवरी में 4.8 प्रतिशत थी। यह भी पिछले पांच महीनों का उच्चतम स्तर है। वहीं, महिलाओं की बेरोजगारी दर 5.1 प्रतिशत से बढ़कर 5.3 प्रतिशत हो गई, जो तीन महीने का सबसे ऊंचा आंकड़ा है। महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर अब भी सीमित हैं, और यह वृद्धि चिंता का विषय है। विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों में महिलाओं के लिए नौकरी की तलाश में कठिनाइयाँ बढ़ गई हैं।
श्रम बल भागीदारी और रोजगार दर में कमी
श्रम बल भागीदारी दर (एलएफपीआर) यानी काम करने या काम की तलाश में लोगों का अनुपात फरवरी के 55.9 प्रतिशत से घटकर मार्च में 55.4 प्रतिशत रह गया। महिलाओं की भागीदारी दर भी घटकर 34.4 प्रतिशत पर आ गई, जो पिछले महीने 35.3 प्रतिशत थी। कार्यकर्ता जनसंख्या अनुपात (डब्ल्यूपीआर) यानी 15 साल और उससे अधिक उम्र के लोगों में रोजगार प्राप्त लोगों का अनुपात भी फरवरी के 53.2 प्रतिशत से घटकर मार्च में 52.6 प्रतिशत रह गया। इसका मतलब है कि न केवल नौकरियों की संख्या में कमी आई है, बल्कि काम की तलाश करने वालों की संख्या में भी गिरावट आई है, जो एक गंभीर संकेत है।
