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भारत में मौसम डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट 'RAINMUMBAI' का आगाज़

नेशनल कमोडिटी एक्सचेंज (NCDEX) ने 'RAINMUMBAI' नामक भारत का पहला एक्सचेंज-ट्रेडेड मौसम डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट लॉन्च किया है। यह कॉन्ट्रैक्ट मुंबई में वर्षा के आंकड़ों पर आधारित है और इसका उद्देश्य वित्तीय जोखिमों से बचाना है। NCDEX के सीईओ ने बताया कि यह कॉन्ट्रैक्ट सभी संबंधित पक्षों को मानसून की अनिश्चितता को प्रबंधित करने में मदद करेगा। इस लेख में मौसम डेरिवेटिव के कार्य, इसके लाभ और उपयोगकर्ताओं के बारे में जानकारी दी गई है।
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भारत में मौसम डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट 'RAINMUMBAI' का आगाज़

भारत का पहला मौसम डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट


नेशनल कमोडिटी एक्सचेंज (NCDEX) ने 'RAINMUMBAI' नामक भारत का पहला एक्सचेंज-ट्रेडेड मौसम डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट पेश किया है। यह कॉन्ट्रैक्ट मुंबई में वर्षा के आंकड़ों पर आधारित होगा, जो भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) से प्राप्त किए जाएंगे।


NCDEX के सीईओ का बयान

NCDEX के प्रबंध निदेशक और सीईओ अरुण रास्ते ने कहा, 'भारत ने सदियों से मानसून की अनिश्चितता का सामना किया है। रेनमुंबई सभी संबंधित पक्षों को इस अनिश्चितता को प्रबंधित करने के लिए एक विनियमित और वैज्ञानिक उपकरण प्रदान करता है।'


कॉंट्रैक्ट का उद्देश्य

यह कॉन्ट्रैक्ट बाजार के प्रतिभागियों को वर्षा में होने वाले उतार-चढ़ाव से उत्पन्न वित्तीय जोखिमों से बचाने के लिए बनाया गया है। इसका निपटान नकद में होगा और यह मॉनसून के दौरान शहर के दीर्घकालिक औसत (LPA) से वास्तविक वर्षा के विचलन को ट्रैक करेगा।


व्यापार के लिए केवल जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर के अनुबंध उपलब्ध होंगे, जो मुंबई के मानसून पैटर्न को ध्यान में रखेंगे।


स्ट्रक्चर्ड मॉडल

ये कॉन्ट्रैक्ट वैज्ञानिक रूप से स्ट्रक्चर्ड क्युमुलेटिव रेनफॉल डेविएशन (CDR) मॉडल पर आधारित हैं। यह मॉडल मानसून के महीनों के दौरान वास्तविक वर्षा का दीर्घकालिक औसत (LPA) से विचलन मापता है। इसे आईआईटी बॉम्बे के सहयोग से विकसित किया गया है।


हालांकि, NCDEX ने लिक्विडिटी संबंधी चिंताओं को स्वीकार किया है और व्यापारियों के लिए कॉन्ट्रैक्ट की लिक्विडिटी सुनिश्चित करने के लिए एक बाजार निर्माता नियुक्त किया गया है।


मौसम डेरिवेटिव क्या है?

मौसम डेरिवेटिव एक वित्तीय कॉन्ट्रैक्ट है जो मौसम के आधार पर ट्रेडिंग की अनुमति देता है। इसका उद्देश्य मौसम से होने वाले नुकसान से बचाना है। इसका उपयोग विशेष रूप से कृषि, बिजली, पर्यटन, एयरलाइन और ऊर्जा कंपनियों द्वारा किया जाता है।


सरल शब्दों में, यदि किसी व्यवसाय की आय बारिश, गर्मी, ठंड या बर्फबारी पर निर्भर करती है, तो वह मौसम डेरिवेटिव खरीदकर अपने नुकसान का जोखिम कम कर सकता है।


कैसे काम करता है?

मान लीजिए कि एक शहर में एक आइसक्रीम कंपनी है, जिसकी बिक्री गर्मियों में अधिक होती है। यदि मौसम ठंडा हो जाता है, तो बिक्री में गिरावट आएगी। ऐसे में कंपनी एक मौसम डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट खरीदती है।


कॉन्ट्रैक्ट में पहले से तय होता है कि यदि तापमान एक निश्चित सीमा से नीचे गया, तो कंपनी को भुगतान किया जाएगा। यदि मौसम खराब होता है, तो व्यवसाय को नुकसान होगा, लेकिन डेरिवेटिव से उसे पैसा मिल जाएगा।


व्यापारियों और कंपनियों के लाभ

जोखिम में कमी: कृषि, होटल, बिजली और यात्रा कंपनियां मौसम के कारण होने वाले बड़े नुकसान से बच सकती हैं।


स्थिर आय: खराब मौसम के बावजूद कंपनी की आय प्रभावित नहीं होती।


बेहतर योजना: कंपनियां पहले से अपने खर्च और मुनाफे का अनुमान लगा सकती हैं।


निवेशकों के लिए नए अवसर: कुछ व्यापारी मौसम के पूर्वानुमान के आधार पर ट्रेडिंग करते हैं।


कौन करता है सबसे ज्यादा उपयोग?

किसान और कृषि कंपनियां।


बिजली कंपनियां।


एयरलाइंस।


होटल और पर्यटन उद्योग।


पेय पदार्थ और आइसक्रीम कंपनियां।


अमेरिका और यूरोप में मौसम डेरिवेटिव का बाजार काफी बड़ा है, जबकि भारत में यह अभी शुरुआती स्तर पर है। जलवायु परिवर्तन और अनिश्चित मौसम के कारण भविष्य में इसकी मांग तेजी से बढ़ सकती है।