भारत में स्मार्टफोन सुरक्षा मानकों को लेकर सरकार और कंपनियों के बीच विवाद
भारत सरकार स्मार्टफोन निर्माताओं के लिए नए सुरक्षा मानकों को लागू करने की योजना बना रही है, जिससे कंपनियों में चिंता बढ़ गई है। प्रस्ताव के तहत, कंपनियों को अपने डिवाइस का सोर्स कोड साझा करना पड़ सकता है, जिससे गोपनीयता और तकनीकी सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं। एप्पल और सैमसंग जैसी कंपनियों ने इस पर आपत्ति जताई है। इस लेख में जानें कि कैसे यह प्रस्ताव यूज़र डेटा सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है और उद्योग के लिए क्या चुनौतियाँ उत्पन्न कर सकता है।
| Jan 11, 2026, 22:56 IST
स्मार्टफोन कंपनियों के लिए नए सुरक्षा मानक
भारत सरकार और स्मार्टफोन निर्माताओं के बीच एक नई टकराव की स्थिति उत्पन्न हो रही है। हालिया जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार स्मार्टफोन कंपनियों के लिए सख्त सुरक्षा मानकों को लागू करने की योजना बना रही है। इसके तहत, कंपनियों को अपने उपकरणों का सोर्स कोड सरकार के साथ साझा करना पड़ सकता है और सॉफ्टवेयर में कई आवश्यक परिवर्तन करने होंगे। इस प्रस्ताव पर एप्पल और सैमसंग जैसी प्रमुख कंपनियों ने आपत्ति जताई है।
यूज़र डेटा सुरक्षा को बढ़ावा देने की कोशिश
यह प्रस्ताव नरेंद्र मोदी सरकार की उस पहल का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य ऑनलाइन धोखाधड़ी और डेटा चोरी की बढ़ती घटनाओं के बीच यूज़र डेटा की सुरक्षा को मजबूत करना है। ध्यान देने योग्य है कि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्मार्टफोन बाजार है, जहां लगभग 75 करोड़ मोबाइल फोन सक्रिय हैं।
सुरक्षा मानकों का मसौदा
सरकार द्वारा तैयार किए गए 83 सुरक्षा मानकों के मसौदे में यह भी शामिल है कि कंपनियों को बड़े सॉफ्टवेयर अपडेट से पहले सरकार को सूचित करना होगा। एक रिपोर्ट के अनुसार, टेक कंपनियों का कहना है कि इस तरह की शर्तों का कोई अंतरराष्ट्रीय उदाहरण नहीं है और इससे उनकी तकनीकी जानकारी सार्वजनिक होने का खतरा है।
सरकार की प्रतिक्रिया
आईटी सचिव एस. कृष्णन ने कहा है कि उद्योग की सभी उचित चिंताओं पर ध्यान दिया जाएगा और जल्दबाजी में किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जाएगा। मंत्रालय के प्रवक्ता ने बातचीत के संदर्भ में टिप्पणी करने से इनकार किया है।
पिछले विवादों का संदर्भ
यह पहली बार नहीं है जब सरकार और टेक कंपनियों के बीच टकराव हुआ है। हाल ही में, सरकार को एक सरकारी साइबर सुरक्षा ऐप को अनिवार्य करने का आदेश वापस लेना पड़ा था, जबकि पिछले वर्ष सुरक्षा कैमरों की जांच को लेकर उद्योग की आपत्तियों को नजरअंदाज किया गया था।
बाजार हिस्सेदारी
बाजार हिस्सेदारी के संदर्भ में, Xiaomi और सैमसंग की हिस्सेदारी क्रमशः लगभग 19% और 15% है, जबकि एप्पल की हिस्सेदारी लगभग 5% है। इन कंपनियों के एंड्रॉयड फोन गूगल के ऑपरेटिंग सिस्टम पर चलते हैं।
सोर्स कोड की संवेदनशीलता
सोर्स कोड तक पहुंच एक संवेदनशील मुद्दा है, जिसे कंपनियां अपनी बौद्धिक संपदा मानती हैं। प्रस्ताव के अनुसार, भारतीय प्रयोगशालाओं में सोर्स कोड का विश्लेषण और परीक्षण किया जा सकता है। इस पर एमएआईटी ने आपत्ति जताते हुए कहा है कि गोपनीयता और सुरक्षा कारणों से ऐसा करना संभव नहीं है और यूरोप, उत्तरी अमेरिका या ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में भी ऐसी शर्तें लागू नहीं हैं।
अन्य प्रस्तावित शर्तें
इसके अलावा, प्रस्ताव में फोन में ऑटोमैटिक मैलवेयर स्कैनिंग, बैकग्राउंड में कैमरा और माइक्रोफोन के उपयोग पर रोक, और सिस्टम लॉग को कम से कम 12 महीने तक डिवाइस में स्टोर करने जैसी शर्तें भी शामिल हैं। उद्योग का कहना है कि इससे बैटरी पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और स्टोरेज की समस्या उत्पन्न होगी।
आगे की चर्चा
सरकार इन सुरक्षा मानकों को कानूनी रूप देने पर विचार कर रही है और इस पर आगे चर्चा के लिए आईटी मंत्रालय और टेक कंपनियों के बीच जल्द बैठक प्रस्तावित है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और उद्योग के बीच संतुलन कैसे स्थापित होता है और यूज़र सुरक्षा तथा तकनीकी गोपनीयता के बीच किस तरह का रास्ता निकलता है।
