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भारत सरकार ने आधार ऐप को स्मार्टफोन्स पर अनिवार्य करने की योजना वापस ली

भारत सरकार ने स्मार्टफोन निर्माताओं के विरोध के चलते आधार ऐप को नए स्मार्टफोन्स पर अनिवार्य करने की योजना को वापस ले लिया है। Apple और Samsung जैसी कंपनियों ने सुरक्षा और गोपनीयता को लेकर गंभीर चिंताएं जताई थीं। UIDAI ने इस निर्णय की पुष्टि की है, लेकिन मंत्रालय ने इस बारे में कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया। यह निर्णय उद्योग के हितधारकों के साथ बातचीत के बाद लिया गया, जो दर्शाता है कि उनकी राय महत्वपूर्ण थी। यह पहली बार नहीं है जब ऐसी योजना बनाई गई थी, और इससे पहले भी कई बार इसी तरह के प्रस्तावों का विरोध किया गया था।
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भारत सरकार ने आधार ऐप को स्मार्टफोन्स पर अनिवार्य करने की योजना वापस ली

स्मार्टफोन निर्माताओं का विरोध

भारत सरकार ने स्मार्टफोन निर्माताओं और उद्योग के विरोध के चलते उस विवादास्पद योजना को रद्द कर दिया है, जिसमें नए स्मार्टफोन्स पर आधार ऐप को पहले से इंस्टॉल करना अनिवार्य किया जाना था। Apple और Samsung जैसी प्रमुख कंपनियों ने इस प्रस्ताव पर सुरक्षा और गोपनीयता से संबंधित गंभीर चिंताएं व्यक्त की थीं।


एक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने शुक्रवार को इस निर्णय की पुष्टि की।


UIDAI की बातचीत

इस वर्ष की शुरुआत में, UIDAI ने IT मंत्रालय से Apple और Google जैसी स्मार्टफोन निर्माताओं के साथ बातचीत करने का अनुरोध किया था। इसका उद्देश्य भारत में बिकने वाले सभी नए उपकरणों पर आधार ऐप को पहले से इंस्टॉल करवाना था। आधार, जो एक 12 अंकों की डिजिटल पहचान है, उंगलियों के निशान और आँखों की पुतलियों के स्कैन से जुड़ी होती है, का उपयोग पहले से ही 1.34 अरब से अधिक लोग विभिन्न सेवाओं के लिए कर रहे हैं। इनमें बैंकिंग, टेलीकॉम वेरिफिकेशन और एयरपोर्ट पर तेज़ एंट्री शामिल हैं।


IT मंत्रालय का निर्णय

हालांकि, इस प्रस्ताव की समीक्षा के बाद, IT मंत्रालय ने इस ऐप को अनिवार्य बनाने की दिशा में आगे बढ़ने का निर्णय नहीं लिया। UIDAI ने इस योजना को वापस लेने का कोई विशेष कारण नहीं बताया, और रिपोर्ट के अनुसार, मंत्रालय ने इस विषय पर पूछे गए सवालों का उत्तर नहीं दिया। यह निर्णय इलेक्ट्रॉनिक्स और स्मार्टफोन उद्योग के हितधारकों के साथ बातचीत के बाद लिया गया, जिससे स्पष्ट होता है कि उद्योग की राय ने इस निर्णय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


पुनरावृत्ति की कोशिशें

यह पहली बार नहीं है जब इस तरह की योजना बनाई गई हो। वास्तव में, पिछले दो वर्षों में सरकार ने स्मार्टफोन्स पर पहले से इंस्टॉल किए गए सरकारी ऐप को बढ़ावा देने की यह छठी कोशिश की थी। हर बार, डिवाइस निर्माताओं ने इसका विरोध किया है।


उपभोक्ता की गोपनीयता पर चिंता

कंपनियों ने लगातार उपयोगकर्ता की गोपनीयता, डिवाइस की सुरक्षा और संभावित अनुकूलता से संबंधित चिंताओं को उठाया है। इसके अलावा, कुछ व्यावहारिक चिंताएँ भी थीं; निर्माताओं ने चेतावनी दी थी कि इस तरह के आदेशों से उत्पादन लागत बढ़ सकती है, खासकर जब भारत में निर्मित और निर्यात के लिए बनाए गए उपकरणों के लिए अलग-अलग उत्पादन लाइनें स्थापित करनी पड़ें। सूत्रों के अनुसार, Apple और Samsung ने विशेष रूप से सुरक्षा और संरक्षा से जुड़े प्रभावों को लेकर बार-बार अपनी चिंताएँ व्यक्त की थीं।


पिछले अनुभव

दिसंबर में भी कुछ ऐसी ही स्थिति उत्पन्न हुई थी, जब सरकार ने कुछ समय के लिए स्मार्टफोन्स पर एक टेलीकॉम सुरक्षा ऐप को पहले से इंस्टॉल करना अनिवार्य कर दिया था। उद्योग के कड़े विरोध के बाद, कुछ ही दिनों में उस आदेश को वापस ले लिया गया था। सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, IT मंत्रालय आमतौर पर डिवाइस पर अनिवार्य रूप से ऐप इंस्टॉल करवाने के पक्ष में नहीं होता, जब तक कि ऐसा करना अत्यंत आवश्यक न हो।