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भारत सरकार ने चांदी के आयात पर नई पाबंदियां लगाईं

भारत सरकार ने चांदी के आयात पर नई पाबंदियां लागू की हैं, जिसका उद्देश्य विदेशी मुद्रा की सुरक्षा और व्यापार घाटे को कम करना है। इस कदम के पीछे सोने पर बढ़े हुए आयात शुल्क के कारण चांदी की खरीद में संभावित वृद्धि की चिंता है। सरकार ने पहले ही सोने के आयात शुल्क में वृद्धि की है। इस स्थिति में, चांदी के आयात और खरीद में गिरावट की संभावना है। जानें इस नई नीति के पीछे के कारण और इसके संभावित प्रभावों के बारे में।
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भारत सरकार ने चांदी के आयात पर नई पाबंदियां लगाईं

चांदी के आयात पर नई पाबंदियों का ऐलान


मध्य पूर्व में चल रहे संकट के बीच, विदेशी मुद्रा की सुरक्षा के लिए सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने चांदी के आयात पर नई पाबंदियां लागू की हैं। कई चांदी की श्रेणियों को फ्री लिस्ट से हटा कर प्रतिबंधित श्रेणी में डाल दिया गया है, जिसका अर्थ है कि अब इन श्रेणियों की चांदी का आयात पहले की तरह सरल नहीं होगा और इसके लिए अतिरिक्त मंजूरी की आवश्यकता हो सकती है। यह कदम सरकार ने कीमती धातुओं के बढ़ते आयात को नियंत्रित करने और व्यापार घाटे को कम करने के उद्देश्य से उठाया है। इससे पहले, सरकार ने सोने के आयात शुल्क में भी वृद्धि की थी।


चांदी की खरीद में बढ़ती रुचि

सरकार को यह चिंता है कि सोने पर बढ़े हुए आयात शुल्क के कारण लोग चांदी खरीदने का विकल्प चुन सकते हैं। इसी संभावना को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है। हाल ही में, सरकार ने सोने की इंपोर्ट ड्यूटी में 6% और चांदी की इंपोर्ट ड्यूटी में 15% की वृद्धि की है। इसके बावजूद, यह आशंका जताई जा रही थी कि निवेशक सोने की तुलना में सस्ती चांदी में अधिक खरीदारी कर सकते हैं।


विदेशी मुद्रा की सुरक्षा पर जोर

मध्य पूर्व संकट के चलते, सरकार विदेशी मुद्रा की सुरक्षा के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। इस संकट के जल्द सुलझने की कोई संभावना नहीं दिख रही है, जिसके कारण प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों से अपील की है कि वे पेट्रोलियम उत्पादों का संयमित उपयोग करें और सोने की खरीद को एक साल के लिए रोक दें ताकि विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखा जा सके।


हालांकि, सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल में सोने और चांदी का आयात पहले ही लगभग 30 वर्षों के निचले स्तर पर पहुंच गया है। बढ़े हुए आयात शुल्क और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कीमतें इसके प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। नई पाबंदियों के साथ, चांदी के आयात और खरीद में और गिरावट देखने को मिल सकती है।