भारतीय मुद्रा और अर्थव्यवस्था पर अमेरिका-ईरान तनाव का प्रभाव
खाड़ी क्षेत्र में तनाव का असर
अमेरिका और ईरान के बीच खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव का प्रभाव भारतीय अर्थव्यवस्था और मुद्रा बाजार पर स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया 45 पैसे गिरकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 94.67 के ऐतिहासिक निम्न स्तर पर पहुँच गया। होर्मुज़ जलडमरूमध्य में जारी गोलीबारी और कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि ने निवेशकों की चिंताओं को बढ़ा दिया है। अमेरिका और ईरान की सेनाओं के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य के निकट गोलीबारी की घटनाओं के कारण ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतें 101.00 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गई हैं, जिससे घरेलू मुद्रा पर दबाव बढ़ा है.
निवेशकों की धारणा पर प्रभाव
विदेशी मुद्रा व्यापारियों के अनुसार, ईरान द्वारा अमेरिका पर युद्धविराम उल्लंघन का आरोप लगाने और अमेरिका के जवाबी हमलों ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया है। ये हमले होर्मुज जलडमरूमध्य और नागरिक क्षेत्रों में हुए, जबकि अमेरिका के राष्ट्रपति ने कहा कि युद्धविराम अभी भी लागू है।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 94.58 प्रति डॉलर पर खुला, लेकिन बाद में गिरकर 94.67 प्रति डॉलर पर पहुँच गया, जो पिछले बंद भाव से 45 पैसे की कमी दर्शाता है। बृहस्पतिवार को रुपया 27 पैसे की बढ़त के साथ 94.22 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।
शेयर बाजार की स्थिति
इस बीच, घरेलू शेयर बाजारों में सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 353.50 अंक गिरकर 77,491.02 अंक पर और निफ्टी 109.25 अंक फिसलकर 24,225.20 अंक पर रहा। अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड का भाव 1.08 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 101.14 डॉलर प्रति बैरल रहा। शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) ने बृहस्पतिवार को 340.89 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।
