Newzfatafatlogo

भारतीय रिजर्व बैंक ने रुपये की अस्थिरता को नियंत्रित करने के लिए नियमों में दी राहत

भारतीय रिजर्व बैंक ने रुपये की अस्थिरता को नियंत्रित करने के लिए कुछ कड़े नियमों में राहत देने का निर्णय लिया है। इस कदम से विदेशी मुद्रा व्यापारियों पर लगे प्रतिबंधों में ढील दी गई है, जिससे बाजार में लचीलापन बढ़ेगा। हालांकि, कुछ सीमाएं बरकरार रखी गई हैं। जानें इस निर्णय का बाजार पर क्या प्रभाव पड़ेगा और भविष्य में क्या संभावनाएं हैं।
 | 
भारतीय रिजर्व बैंक ने रुपये की अस्थिरता को नियंत्रित करने के लिए नियमों में दी राहत

रुपये की अस्थिरता पर नियंत्रण के लिए नए कदम

सोमवार को भारतीय रिजर्व बैंक ने रुपये की अस्थिरता को नियंत्रित करने के लिए कुछ कड़े नियमों में ढील देने का निर्णय लिया है। यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब बाजार में उतार-चढ़ाव की चिंताएं बढ़ी हुई थीं।


प्रतिबंधों में ढील

आरबीआई ने विदेशी मुद्रा व्यापारियों पर लगाए गए कुछ प्रतिबंधों को हटा दिया है, विशेष रूप से ऑफशोर नॉन-डिलीवेरेबल फॉरवर्ड (एनडीएफ) बाजार से संबंधित। यह बाजार वास्तविक मुद्रा लेन-देन के बिना भविष्य की दरों पर सौदों का संचालन करता है, जो विनिमय दरों को प्रभावित करता है।


नए अनुबंधों की अनुमति

अब अधिकृत डीलर रुपये से जुड़े नॉन-डिलीवेरेबल डेरिवेटिव अनुबंध देश और विदेश दोनों प्रकार के ग्राहकों को प्रदान कर सकेंगे। इसके अलावा, उपयोगकर्ताओं को अपने विदेशी मुद्रा अनुबंधों को फिर से बुक करने की अनुमति भी दी गई है, जिससे बाजार में लचीलापन बढ़ेगा।


सीमाएं बरकरार

हालांकि, केंद्रीय बैंक ने कुछ सीमाएं बनाए रखी हैं। अधिकृत डीलर्स को रुपये में डेरिवेटिव अनुबंध करने की अनुमति नहीं है। केवल पहले से चल रहे अनुबंधों को रद्द करने या आगे बढ़ाने की छूट दी गई है।


तत्काल प्रभाव से लागू

ये सभी बदलाव तुरंत प्रभाव से लागू हो गए हैं। बैंकों को निर्देश दिया गया है कि वे घरेलू रुपये बाजार में अपनी कुल खुली स्थिति को 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर की सीमा के भीतर रखें।


अंतरराष्ट्रीय बाजार का प्रभाव

मार्च के अंत में, आरबीआई ने रुपये की गिरावट को रोकने के लिए कई सख्त कदम उठाए थे। उस समय कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई थीं, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ा।


सट्टेबाजी सौदों का समापन

10 अप्रैल तक बैंकों ने ऑफशोर बाजार में लगभग 40 अरब डॉलर के सट्टेबाजी सौदों को समाप्त कर दिया, जिसके बाद रुपये में सुधार देखने को मिला। यह अपने सबसे निचले स्तर 95.21 प्रति डॉलर से थोड़ा ऊपर आया है।


आरबीआई का दृष्टिकोण

आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि ये कड़े कदम अस्थायी थे और इन्हें स्थायी रूप से लागू नहीं रखा जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि मार्च में बाजार में अत्यधिक सट्टेबाजी के कारण अस्थिरता बढ़ी थी।


भविष्य की संभावनाएं

केंद्रीय बैंक ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह भारतीय रुपये को वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय बाजार में विश्वास बढ़ाने और रुपये को स्थिर रखने में सहायक हो सकता है, जिससे भविष्य में निवेश और व्यापार गतिविधियों में सुधार हो सकता है।