भारतीय रुपया गिरावट के नए स्तर पर, आरबीआई ने कड़े कदम उठाए
भारतीय अर्थव्यवस्था में उथल-पुथल
नई दिल्ली: 30 मार्च का दिन भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहा। सोमवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया पहली बार 95 के स्तर को पार करते हुए 95.14 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। इस वर्ष की मार्च तिमाही में रुपये की कीमत में 4.4% की गिरावट आई है, जो निवेशकों और नीति निर्माताओं के लिए चिंता का विषय बन गई है।
आरबीआई के कड़े कदम
इस भारी गिरावट के बीच, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बैंकों के 'नेट ओपन फॉरेक्स पोजीशन' पर सख्त प्रतिबंध लगाए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इस निर्णय के बाद विदेशी मुद्रा बाजार में ट्रेडर्स इस सप्ताह भारी उतार-चढ़ाव की आशंका जता रहे हैं। पिछले सप्ताह भी रुपया लगभग 1% गिरा था, जो इसकी चौथी लगातार साप्ताहिक गिरावट थी।
बैंकों की चुनौतियाँ
शुक्रवार को बाजार बंद होने के बाद, केंद्रीय बैंक ने निर्देश जारी किया कि बैंकों को 10 अप्रैल तक यह सुनिश्चित करना होगा कि ऑनशोर डिलीवरेबल मार्केट में उनकी नेट ओपन रुपया पोजीशन 10 करोड़ डॉलर ($100 million) से अधिक न हो। बैंकिंग विशेषज्ञों का मानना है कि इस सख्त समयसीमा के कारण बाजार में अफरा-तफरी मच सकती है, जिससे बैंकों को अपने आर्बिट्राज पोजीशन पर भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
बॉन्ड यील्ड में वृद्धि
रुपये की कमजोरी का सीधा असर सरकारी बॉंड बाजार पर भी पड़ा है। भारत का 10-वर्षीय बेंचमार्क बॉंड यील्ड 21 महीनों में पहली बार 7% के आंकड़े को पार कर गया। दोपहर के सत्र में 10-वर्षीय 6.48% (2035) बॉंड की यील्ड 7.0121% तक पहुंच गई, जबकि पिछले सत्र में यह 6.9419% पर बंद हुई थी।
कच्चे तेल का प्रभाव
घरेलू कारकों के अलावा, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने भी स्थिति को और बिगाड़ दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक तेल की कीमतें ऊंची बनी रहेंगी, सरकारी बॉंड पर दबाव बना रहेगा। बाजार की निगाहें अब आरबीआई के अगले कदम पर टिकी हैं कि क्या वह रुपये की गिरावट को रोकने के लिए बाजार में सीधे हस्तक्षेप करेगा या नहीं।
