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भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले ऐतिहासिक गिरावट पर

भारतीय रुपया आज डॉलर के मुकाबले अपने ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गया है, जो बाजार में चिंता का कारण बन गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक अनिश्चितता और ग्रीनलैंड विवाद के चलते रुपये पर दबाव बढ़ा है। इस गिरावट का असर उभरते बाजारों की मुद्राओं पर भी पड़ा है, और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है। जानें इस गिरावट के पीछे के कारण और भारतीय रिजर्व बैंक की प्रतिक्रिया के बारे में।
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भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले ऐतिहासिक गिरावट पर

भारतीय रुपया ऐतिहासिक स्तर पर गिरा


नई दिल्ली: भारतीय रुपया आज डॉलर के मुकाबले अपने ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गया है। बुधवार को रुपये में तेज गिरावट देखी गई, जो 91.2950 प्रति डॉलर तक पहुंच गई। यह स्तर दिसंबर में बने पिछले रिकॉर्ड 91.0750 से भी कमज़ोर है। इस गिरावट ने बाजार और आम जनता के बीच चिंता का माहौल बना दिया है।


रुपये पर दबाव की वजह

विशेषज्ञों के अनुसार, रुपये पर दबाव डालने वाली मुख्य वजह वैश्विक अनिश्चितता है। ग्रीनलैंड विवाद के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजारों में डर का माहौल बना हुआ है। ऐसे में निवेशक जोखिम लेने से बच रहे हैं और सुरक्षित निवेश की ओर रुख कर रहे हैं।


किस पर पड़ रहा है असर?

इस गिरावट का सीधा प्रभाव उभरते बाजारों की मुद्राओं पर पड़ा है, जिसमें भारतीय रुपया भी शामिल है। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने रुपये की कमजोरी को और बढ़ा दिया है। इस वर्ष अब तक विदेशी निवेशक लगभग 3 अरब डॉलर भारतीय बाजार से निकाल चुके हैं।


2025 में अब तक लगभग 18.9 अरब डॉलर का रिकॉर्ड आउटफ्लो देखा गया है। इस कमी ने रुपये की मांग को कमजोर कर दिया है। इसके अलावा, आयातकों की बढ़ती हेजिंग भी रुपये पर दबाव बना रही है।


आयातकों और निर्यातकों की स्थिति

आयातक आगे और गिरावट की आशंका में डॉलर खरीद रहे हैं, जबकि निर्यातक अपेक्षाकृत कम सक्रिय हैं। इस असंतुलन के कारण विदेशी मुद्रा बाजार में रुपये की स्थिति और कमजोर हो रही है।


ग्रीनलैंड विवाद का प्रभाव

ग्रीनलैंड विवाद का असर शेयर बाजार पर भी देखने को मिला है। मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार आठ महीनों की सबसे बड़ी गिरावट के साथ बंद हुआ। इस दौरान विदेशी निवेशकों ने 300 मिलियन डॉलर से अधिक की बिकवाली की। जब बाजार में डर बढ़ता है, तो निवेशक पैसा निकालते हैं और रुपये पर दबाव बढ़ जाता है।


आरबीआई की प्रतिक्रिया

भारतीय रिजर्व बैंक वर्तमान स्थिति पर नजर बनाए हुए है। आरबीआई किसी एक स्तर को बनाए रखने का प्रयास नहीं कर रहा है, बल्कि समय-समय पर हस्तक्षेप कर गिरावट की गति को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि गिरावट सामान्य प्रवाह के कारण है, तो आरबीआई इसे सहन कर सकता है, लेकिन यदि सट्टेबाजी का दबाव बढ़ता है, तो केंद्रीय बैंक सख्त कदम उठा सकता है।