भारतीय रुपया: वैश्विक अस्थिरता के बीच गिरावट और संभावित उपाय
भारतीय रुपया पर दबाव
वैश्विक बाजारों में चल रही अस्थिरता के कारण भारतीय रुपया लगातार कमजोर हो रहा है। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का प्रभाव अब भारतीय मुद्रा पर स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। डॉलर के मुकाबले रुपया 97 के स्तर के करीब पहुंच गया है, जिससे सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक की चिंताएं बढ़ गई हैं.
रुपये की गिरावट का कारण
हालिया जानकारी के अनुसार, फरवरी के अंत में मध्य पूर्व में संघर्ष शुरू होने के बाद से रुपया लगभग 6 प्रतिशत तक कमजोर हो चुका है। इस अवधि में, भारतीय मुद्रा ने डॉलर के मुकाबले कई बार नया रिकॉर्ड निचला स्तर भी छुआ है.
आरबीआई की बैठकें
भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने हाल के दिनों में कई महत्वपूर्ण बैठकें की हैं। इन बैठकों में रुपये की गिरावट को रोकने और विदेशी मुद्रा बाजार को स्थिर रखने के उपायों पर चर्चा की गई.
ब्याज दरों में संभावित वृद्धि
रिजर्व बैंक जिन विकल्पों पर विचार कर रहा है, उनमें ब्याज दरों में वृद्धि भी शामिल है। अगली मौद्रिक नीति बैठक 3 से 5 जून के बीच प्रस्तावित है, लेकिन जरूरत पड़ने पर रिजर्व बैंक पहले भी अचानक निर्णय ले चुका है.
विदेशी निवेश को बढ़ावा
विदेशी निवेश को बढ़ाने के लिए अनिवासी भारतीयों के लिए विशेष विदेशी मुद्रा जमा योजना लाने पर भी विचार किया जा रहा है। इसके अलावा, सरकार संप्रभु डॉलर बॉंड जारी करने जैसे विकल्पों पर भी चर्चा कर सकती है, लेकिन इसके लिए केंद्र सरकार की मंजूरी आवश्यक होगी.
2013 का अनुभव
2013 में जब वैश्विक बाजारों में भारी उथल-पुथल हुई थी, तब भारत ने अनिवासी भारतीयों से विदेशी मुद्रा जुटाने के लिए विशेष योजना शुरू की थी। उस समय लगभग 30 अरब डॉलर जुटाए गए थे, और अब नई योजना के जरिए लगभग 50 अरब डॉलर जुटाने की उम्मीद है.
विदेशी निवेशकों की निकासी
विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि और विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी ने रुपये पर अतिरिक्त दबाव डाला है। वर्ष 2026 में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से रिकॉर्ड स्तर पर पैसा निकाला है, जो 19 अरब डॉलर से अधिक है.
बॉंड प्रतिफल का अंतर
अमेरिका में ऊंची ब्याज दरों के कारण भारत और अमेरिका के बॉंड प्रतिफल के बीच का अंतर काफी कम हो गया है, जिससे विदेशी निवेशकों का रुझान भारतीय बाजार की ओर कम होता दिखाई दे रहा है.
आरबीआई का स्वैप नीलामी कार्यक्रम
हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक ने 5 अरब डॉलर का स्वैप नीलामी कार्यक्रम घोषित किया है ताकि बैंकिंग प्रणाली में तरलता बनी रहे और डॉलर भंडार मजबूत हो सके. सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में इस तरह की और नीलामियां भी हो सकती हैं.
आर्थिक बुनियाद की मजबूती
आर्थिक जानकारों का कहना है कि भारत की बैंकिंग व्यवस्था और आर्थिक बुनियाद अभी भी मजबूत हैं, लेकिन वैश्विक तनाव और तेल कीमतों के दबाव ने फिलहाल रुपये की स्थिति को कमजोर कर दिया है.
