भारतीय रुपये में गिरावट: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.70 पर बंद
भारतीय मुद्रा बाजार में दबाव
मंगलवार को भारतीय मुद्रा बाजार में रुपये ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 44 पैसे की गिरावट के साथ 95.70 के स्तर पर कारोबार समाप्त किया। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि और अमेरिकी डॉलर की मजबूती ने भारतीय मुद्रा पर नकारात्मक प्रभाव डाला।
रुपये की शुरुआत और गिरावट
जानकारी के अनुसार, अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपये की शुरुआत 95.43 पर हुई। कारोबार के दौरान, यह 95.33 तक मजबूत हुआ, लेकिन बाद में गिरावट के कारण 95.76 के निचले स्तर तक पहुंच गया। सोमवार को रुपये ने 34 पैसे की मजबूती के साथ 95.26 पर बंद होने में सफलता पाई थी, जब भारतीय रिजर्व बैंक ने डॉलर की बिक्री की थी।
पश्चिम एशिया में तनाव का प्रभाव
विदेशी मुद्रा व्यापारियों का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने निवेशकों की चिंताओं को बढ़ा दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य में अनिश्चितता के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, जिसका सीधा असर भारत जैसे तेल आयातक देशों की मुद्रा पर पड़ता है।
विश्लेषकों की राय
मिराए एसेट शेयरखान के रिसर्च विश्लेषक अनुज चौधरी ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के कारण रुपये पर दबाव बना रह सकता है। हालांकि, यदि कच्चे तेल की कीमतों में कमी आती है, तो रुपये को कुछ सहारा मिल सकता है। उन्होंने अनुमान लगाया कि डॉलर-रुपया विनिमय दर 95.20 से 95.85 के बीच रह सकती है।
डॉलर सूचकांक और कच्चे तेल की कीमतें
डॉलर सूचकांक, जो छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाता है, 99.05 पर कारोबार कर रहा है। वहीं, ब्रेंट कच्चा तेल वायदा कारोबार में लगभग 3.43 प्रतिशत बढ़कर 99.94 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान पर अमेरिकी हमलों और होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ती चिंताओं के कारण तेल बाजार में तेजी आई है।
घरेलू शेयर बाजार की स्थिति
घरेलू शेयर बाजार में भी कमजोरी का माहौल बना रहा। बीएसई सेंसेक्स 479.26 अंक गिरकर 76,009.70 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 118 अंक टूटकर 23,913.70 पर पहुंच गया। कमजोर शेयर बाजार का असर रुपये की चाल पर भी देखा गया।
विदेशी निवेशकों की गतिविधि
हालांकि, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने कुछ राहत प्रदान की। एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, सोमवार को विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में 821.75 करोड़ रुपये की खरीदारी की। इसके बावजूद, वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण निवेशकों का रुख सतर्क बना हुआ है।
भविष्य की संभावनाएं
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतें, अमेरिकी डॉलर की स्थिति और पश्चिम एशिया के हालात भारतीय रुपये की दिशा को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
