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भारतीय रुपये में गिरावट: वैश्विक आर्थिक दबाव और कच्चे तेल की कीमतें

भारतीय रुपये में गिरावट का मुख्य कारण वैश्विक आर्थिक दबाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हैं। मंगलवार को रुपये ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 90.96 के स्तर पर गिरकर निवेशकों की चिंताओं को बढ़ा दिया। घरेलू शेयर बाजारों में भी गिरावट देखी गई, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ा। जानें रुपये की वर्तमान स्थिति और शेयर बाजार के आंकड़े।
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भारतीय रुपये में गिरावट: वैश्विक आर्थिक दबाव और कच्चे तेल की कीमतें

भारतीय रुपये की स्थिति

वैश्विक आर्थिक परिवर्तनों और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने भारतीय रुपये को कमजोर कर दिया है। मंगलवार को शुरुआती कारोबार में, रुपये ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 7 पैसे की गिरावट के साथ 90.96 के स्तर पर पहुंच गया। विदेशी बाजारों में डॉलर की मजबूती और घरेलू शेयर बाजार में गिरावट ने निवेशकों की चिंताओं को बढ़ा दिया है।


शेयर बाजार का प्रभाव

विदेशी मुद्रा व्यापारियों के अनुसार, घरेलू शेयर बाजारों की कमजोर शुरुआत ने रुपये पर और दबाव डाला। हालांकि, विदेशी निवेशकों के निवेश ने रुपये को कुछ सहारा दिया और तेज गिरावट को रोकने में मदद की। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में, रुपये की शुरुआत अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 90.91 पर हुई।


रुपये की गिरावट का विश्लेषण

फिर से, रुपये ने 90.96 प्रति डॉलर पर गिरावट दिखाई, जो पिछले बंद भाव से 7 पैसे कम है। सोमवार को रुपये ने 90.89 पर 5 पैसे की बढ़त के साथ कारोबार समाप्त किया था। इस बीच, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.11 प्रतिशत बढ़कर 97.81 पर पहुंच गया।


शेयर बाजार की स्थिति

घरेलू शेयर बाजारों में, सेंसेक्स ने शुरुआती कारोबार में 525.29 अंक की गिरावट के साथ 82,769.37 अंक पर और निफ्टी ने 145.85 अंक की कमी के साथ 25,567.15 अंक पर पहुंच गया। अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड का भाव 0.85 प्रतिशत बढ़कर 72.10 डॉलर प्रति बैरल रहा। शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने सोमवार को 3,483.70 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।