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भारतीय शेयर बाजार में आईटी शेयरों की बिकवाली से गिरावट

मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में आईटी शेयरों की बिकवाली के कारण गिरावट आई। बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी50 में भारी कमी देखी गई, जिसका मुख्य कारण आईटी कंपनियों के शेयरों में गिरावट थी। निवेशकों की चिंताओं का कारण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में बढ़ती अनिश्चितता और वैश्विक व्यापार तनाव है। जानें इस गिरावट के पीछे के कारण और बाजार की वर्तमान स्थिति के बारे में।
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भारतीय शेयर बाजार में आईटी शेयरों की बिकवाली से गिरावट

शेयर बाजार में गिरावट का माहौल

मंगलवार की सुबह दलाल स्ट्रीट पर स्थिति कुछ अच्छी नहीं थी, और जैसे-जैसे कारोबार बढ़ा, प्रमुख सूचकांकों पर दबाव बढ़ता गया। अंततः, बिकवाली में तेजी आई, जिससे बीएसई सेंसेक्स 1,068.74 अंक गिरकर 82,225.92 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी50 288.35 अंक की कमी के साथ 25,424.65 पर पहुंच गया।


आईटी शेयरों में बिकवाली का प्रभाव

गिरावट का मुख्य कारण आईटी शेयरों में भारी बिकवाली थी। निफ्टी आईटी इंडेक्स ने शुरुआती कारोबार में लगभग 5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की। इसका अर्थ है कि कई प्रमुख आईटी कंपनियों के शेयर एक साथ गिरे, जिससे पूरे बाजार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा।


बड़े आईटी शेयरों में गिरावट

जानकारी के अनुसार, इंफोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, एचसीएलटेक, टेक महिंद्रा और विप्रो जैसे प्रमुख शेयर गहरे लाल निशान में बंद हुए। एलटीआईमाइंडट्री में 6 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई, जबकि टेक महिंद्रा और एचसीएलटेक में भी 5 से 6 प्रतिशत की कमी आई। इंफोसिस और टीसीएस जैसे बड़े शेयरों में लगभग 3 से 4 प्रतिशत की कमजोरी देखी गई।


निवेशकों की चिंता

निवेशकों की चिंताओं का मुख्य कारण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में बढ़ती अनिश्चितता है। हाल ही में अमेरिका की एआई कंपनी एंथ्रॉपिक ने ऐसे उन्नत टूल पेश किए हैं जो कोडिंग, डॉक्यूमेंटेशन और डेटा प्रोसेसिंग जैसे कार्यों को स्वतः कर सकते हैं। ये वही सेवाएं हैं जिनसे भारतीय आईटी कंपनियां वैश्विक स्तर पर बड़ा कारोबार करती हैं, जिससे भविष्य में मांग में कमी की आशंका बढ़ गई है।


वैश्विक संकेतों का प्रभाव

जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार के अनुसार, टेक शेयरों में कमजोरी एक व्यापक ट्रेंड का हिस्सा है, और अमेरिकी बाजार में सूचीबद्ध भारतीय आईटी कंपनियों के एडीआर पर भी दबाव देखा जा रहा है।


बाजार की चिंता बढ़ाने वाले वैश्विक संकेत

वैश्विक संकेतों ने भी बाजार की चिंता को बढ़ाया है। अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा नए टैरिफ के संकेत मिलने के बाद वहां के बाजारों में गिरावट आई। टैरिफ में बदलाव से अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर असर पड़ता है, जिससे कंपनियां निवेश के फैसले टाल सकती हैं। यूरोपीय संघ द्वारा अमेरिका के साथ एक प्रमुख व्यापार समझौते को रोकने की खबर ने भी अनिश्चितता को बढ़ाया।


कुछ गैर-आईटी शेयरों में मजबूती

हालांकि, टाटा स्टील, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, एशियन पेंट्स और एक्सिस बैंक जैसे कुछ गैर-आईटी शेयरों में हल्की मजबूती देखी गई, लेकिन ये आईटी सेक्टर की बड़ी गिरावट की भरपाई नहीं कर सके।


विदेशी निवेशकों का रुख

विश्लेषकों का कहना है कि विदेशी संस्थागत निवेशक हाल के हफ्तों में भारतीय बाजार में खरीदार रहे हैं, लेकिन उनका ध्यान पूंजीगत सामान और वित्तीय शेयरों पर अधिक है। आईटी सेक्टर में वे अब भी सतर्कता बरत रहे हैं।


तकनीकी विश्लेषण

तकनीकी स्तर पर विशेषज्ञों के अनुसार, निफ्टी के लिए 25,500–25,450 का दायरा महत्वपूर्ण सपोर्ट है। इसके नीचे गिरने पर 25,300 तक गिरावट संभव है, जबकि ऊपर की ओर 25,650–25,750 पर रुकावट देखी जा सकती है। बैंक निफ्टी अपेक्षाकृत स्थिर रहा और 60,900 के ऊपर बने रहने पर व्यापक रुझान सकारात्मक माना जा सकता है।


बाजार की धारणा

कुल मिलाकर, आईटी सेक्टर में तेज बिकवाली, एआई को लेकर बढ़ती चिंताएं और वैश्विक व्यापार तनाव ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया है, और निकट भविष्य में उतार-चढ़ाव की संभावना बनी हुई है।