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भारतीय शेयर बाजार में गिरावट: अमेरिकी टैरिफ का प्रभाव

भारतीय शेयर बाजार में हालिया गिरावट अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ संबंधी बयान के कारण हुई है। इस सप्ताह की शुरुआत से जारी गिरावट ने सेंसेक्स और निफ्टी को प्रभावित किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी निवेशकों की निकासी और वैश्विक बाजारों में बिकवाली के दबाव ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है। जानें इस गिरावट के पीछे के कारण और प्रमुख शेयरों के प्रदर्शन के बारे में।
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भारतीय शेयर बाजार में गिरावट: अमेरिकी टैरिफ का प्रभाव

शेयर बाजार में गिरावट का हाल


सेंसेक्स में 780 और निफ्टी में 263 अंक की गिरावट


बिजनेस डेस्क : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रूस से व्यापारिक संबंध रखने वाले देशों पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने के बयान ने भारतीय शेयर बाजार को हिला दिया है। इस सप्ताह की शुरुआत से शेयर बाजार में गिरावट का सिलसिला जारी है, जो गुरुवार तक बना रहा। आज सप्ताह का अंतिम कारोबारी दिन है, और यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आज बाजार की स्थिति कैसी रहती है।


गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार लाल निशान पर बंद हुआ। वैश्विक बाजारों में बिकवाली के दबाव और संभावित अमेरिकी टैरिफ वृद्धि के चलते बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी में लगभग 1 प्रतिशत की गिरावट आई। विश्लेषकों का मानना है कि विदेशी निवेशकों की निरंतर निकासी के कारण धातु, तेल और गैस तथा अन्य कमोडिटी शेयरों में भारी नुकसान हुआ है।


शेयर बाजार का प्रदर्शन

बीएसई सेंसेक्स, जिसमें 30 शेयर शामिल हैं, 780.18 अंक या 0.92 प्रतिशत गिरकर 84,180.96 अंक पर बंद हुआ। दिन के दौरान इसमें 851.04 अंक या 1 प्रतिशत की गिरावट आई, जो इसे 84,110.10 पर ले गई। वहीं, एनएसई निफ्टी 263.90 अंक या 1.01 प्रतिशत गिरकर 25,876.85 पर बंद हुआ। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 8 पैसे गिरकर 89.95 (अस्थायी) पर बंद हुआ।


प्रमुख शेयरों का प्रदर्शन

सेंसेक्स की 30 कंपनियों में लार्सन एंड टुब्रो, टेक महिंद्रा, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, रिलायंस इंडस्ट्रीज, टाटा स्टील और ट्रेंट सबसे अधिक नुकसान में रहीं। दूसरी ओर, इटरनल, आईसीआईसीआई बैंक, बजाज फाइनेंस और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स को लाभ हुआ।


विशेषज्ञों की राय

विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी टैरिफ को लेकर नई चिंताओं और विदेशी निवेशकों की निरंतर निकासी के कारण घरेलू बाजारों में गिरावट जारी है, जिससे आय वृद्धि के प्रति आशावाद कम हो गया है। एशियाई बाजारों में, दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक ऊंचा रहा, जबकि जापान का निक्केई 225, शंघाई का एसएसई कंपोजिट और हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक नीचे बंद हुए। यूरोप के बाजारों में भी मामूली गिरावट देखी गई।