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भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का दौर जारी, सेंसेक्स में भारी गिरावट

इस सप्ताह भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का माहौल बना रहा, जिसमें सेंसेक्स ने 600 अंक से अधिक की गिरावट दर्ज की। अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा टैरिफ की चेतावनी ने बाजार को प्रभावित किया। वहीं, सोने और चांदी की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है, जो घरेलू मांग और वैश्विक परिस्थितियों से प्रेरित है। जानें और क्या हो रहा है बाजार में।
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भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का दौर जारी, सेंसेक्स में भारी गिरावट

सप्ताह के अंत में सेंसेक्स में गिरावट


पूरे सप्ताह शेयर बाजार में गिरावट का माहौल : अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा भारत समेत कुछ देशों पर 500 प्रतिशत टैरिफ की चेतावनी के कारण इस सप्ताह भारतीय शेयर बाजार में अस्थिरता बनी रही। शुक्रवार को भी बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ, जबकि अन्य वैश्विक बाजारों में तेजी देखी गई। भारतीय बाजार में मुनाफावसूली का दबाव बना रहा, जिससे सेंसेक्स लगातार लाल निशान में रहा।


सेंसेक्स और निफ्टी का प्रदर्शन

शुरुआती कारोबार में थोड़ी तेजी के बाद, 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 604.72 अंक या 0.72 प्रतिशत गिरकर 83,576.24 अंक पर बंद हुआ। दिनभर में इसमें 778.68 अंक या 0.92 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 83,402.28 पर बंद हुआ। वहीं, 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 193.55 अंक या 0.75 प्रतिशत गिरकर 25,683.30 पर बंद हुआ। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 26 पैसे गिरकर 90.16 (अस्थायी) पर आ गया।


सोने और चांदी की कीमतों में वृद्धि

भारतीय सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है। शुक्रवार को भी इन धातुओं के दाम में तेजी देखी गई। विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू मांग और वैश्विक परिस्थितियों के कारण यह वृद्धि हो रही है। दिल्ली सर्राफा बाजार में चांदी का भाव 5,898 रुपये या 2.42 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 2,49,222 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया। इससे पहले गुरुवार को चांदी 2,43,324 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी।


वैश्विक बाजारों में चांदी का प्रदर्शन

वैश्विक बाजारों में भी चांदी ने अच्छा प्रदर्शन किया। मार्च कॉन्ट्रैक्ट 2.82 डॉलर या 3.76 प्रतिशत बढ़कर 77.96 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। रिसर्च हेड रेनिशा चेनानी ने बताया कि प्रमुख कमोडिटी सूचकांकों में सालाना रिबैलेंसिंग के कारण चांदी में 5 प्रतिशत की गिरावट आई थी, जिसके चलते अरबों डॉलर के वायदा अनुबंध बेचे गए थे।


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