भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का सिलसिला जारी, सेंसेक्स में भारी गिरावट
शेयर बाजार में गिरावट का चौथा दिन
मंगलवार को भारतीय शेयर बाजारों में लगातार चौथे कारोबारी सत्र में गिरावट देखी गई, जिसमें बीएसई सेंसेक्स 1,456 अंक गिरकर 74,559.24 अंक पर बंद हुआ। एनएसई निफ्टी भी 23,500 अंक के नीचे आ गया। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष ने बाजार की धारणा को नकारात्मक रूप से प्रभावित किया।
विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा निरंतर पूंजी निकासी और रुपये के ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंचने से भी निवेशकों की मानसिकता पर असर पड़ा। कारोबार के दौरान, सेंसेक्स 1,565.78 अंक गिरकर 74,449.50 अंक तक पहुंच गया। बीएसई में 3,412 शेयरों में गिरावट आई, जबकि 869 शेयरों में वृद्धि हुई।
निफ्टी में भी गिरावट
एनएसई निफ्टी 436.30 अंक यानी 1.83 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,379.55 अंक पर बंद हुआ। जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा कि पश्चिम एशिया में तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के कारण रुपये का मूल्य गिरा है, जिससे घरेलू शेयर बाजार पर दबाव बढ़ा है।
आईटी और रियल एस्टेट शेयरों में व्यापक गिरावट देखी गई, खासकर आईटी शेयरों में, जहां एआई से संबंधित मूल्य दबाव की चिंताएं बढ़ गईं। चार कारोबारी सत्रों में, बीएसई सूचकांक 3,399.28 अंक यानी 4.36 प्रतिशत गिर गया, जबकि निफ्टी 951.4 अंक यानी 3.91 प्रतिशत नीचे आया।
वैश्विक बाजारों का प्रभाव
वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड की कीमत 2.75 प्रतिशत बढ़कर 107.1 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। डॉलर के मुकाबले रुपये में 35 पैसे की गिरावट आई, जिससे यह 95.63 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गया। लाइवलॉन्ग वेल्थ के विश्लेषक हरिप्रसाद के अनुसार, यह गिरावट बाजार में विश्वास की कमी का संकेत है।
उन्होंने कहा कि भारतीय शेयर बाजार पर दबाव तीन प्रमुख कारकों से बढ़ रहा है: कच्चे तेल की कीमतें, रुपये का गिरता मूल्य और विदेशी निवेशकों की पूंजी निकासी।
अंतरराष्ट्रीय स्थिति
अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान के साथ युद्धविराम की स्थिति को 'सबसे कमजोर' बताया है। शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने सोमवार को 8,437.56 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। अन्य एशियाई बाजारों में भी गिरावट देखी गई, जबकि जापान का निक्की लाभ में रहा।
