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भारतीय शेयर बाजार में गिरावट, निवेशकों की सतर्कता बनी रही

भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को गिरावट देखने को मिली, जहां बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी दोनों ही नुकसान में बंद हुए। विदेशी पूंजी प्रवाह को बढ़ावा देने के लिए सरकार के उठाए गए कदमों के बावजूद, निवेशकों की सतर्कता बनी रही। वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक विकास को लेकर चिंताओं ने बाजार पर दबाव डाला। जानें और क्या है इस गिरावट के पीछे के कारण और निवेशकों की प्रतिक्रिया।
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भारतीय शेयर बाजार में गिरावट, निवेशकों की सतर्कता बनी रही

शेयर बाजार का हाल

शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में गिरावट देखी गई। सरकार द्वारा विदेशी पूंजी प्रवाह को बढ़ावा देने के लिए उठाए गए कदमों के बावजूद, निवेशकों का रुख सतर्क बना रहा। आर्थिक विकास और वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों के कारण बाजारों पर दबाव बना रहा। बीएसई सेंसेक्स 116.67 अंक या 0.16 प्रतिशत गिरकर 74,243.34 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 50 49.85 अंक या 0.21 प्रतिशत गिरकर 23,366.70 पर बंद हुआ।


सेंसेक्स में उतार-चढ़ाव

सेंसेक्स में कुल 728.82 अंकों का उतार-चढ़ाव देखा गया। एनएसई का मानक सूचकांक निफ्टी भी 49.85 अंक यानी 0.21 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,366.70 पर बंद हुआ। भारतीय रिजर्व बैंक ने प्रमुख नीतिगत दर रेपो को 5.25 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखा। इसके साथ ही, पश्चिम एशिया में संघर्ष, ऊंची ऊर्जा कीमतें और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में समस्याओं के कारण वृद्धि और मुद्रास्फीति के बढ़ते जोखिमों के बीच विदेशी पूंजी को आकर्षित करने के लिए कई उपायों की घोषणा की गई। सेंसेक्स में शामिल कंपनियों में ट्रेंट, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस), टाटा स्टील, एनटीपीसी, एचसीएल टेक और भारती एयरटेल प्रमुख रूप से नुकसान में रहीं।


सरकार के कदम और बाजार की प्रतिक्रिया

सरकार ने विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) को कर राहत देने वाले अध्यादेश जारी किए, जिसके बाद बाजार सकारात्मक शुरुआत के साथ खुले। इस कदम से विदेशी निवेश को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद थी। हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक के मौद्रिक नीति संबंधी फैसले और संशोधित आर्थिक विकास के अनुमानों पर निवेशकों की प्रतिक्रिया के कारण यह बढ़त अल्पकालिक रही।


वैश्विक घटनाक्रमों का प्रभाव

आरबीआई ने वैश्विक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक जोखिमों का हवाला देते हुए बेंचमार्क रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखा और जीडीपी वृद्धि का अनुमान 6.9 प्रतिशत से घटाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया। वैश्विक घटनाक्रमों ने भी निवेशकों को चिंतित रखा। पश्चिम एशिया में जारी तनाव, इज़राइल-लेबनान युद्धविराम को लेकर अनिश्चितता और होर्मुज़ जलडमरूमध्य के बंद होने की चिंताओं ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और मुद्रास्फीति के जोखिमों को लेकर आशंकाएं बढ़ा दीं।