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भारतीय शेयर बाजार में गिरावट: सेंसेक्स और निफ्टी में कमी

भारतीय शेयर बाजार ने तीन दिनों की तेजी के बाद मंगलवार को गिरावट का सामना किया, जिसमें सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में 1 प्रतिशत तक की कमी आई। बढ़ते कच्चे तेल के दाम और विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया। तेल की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं, जिससे मुद्रास्फीति और आयात बिल को लेकर चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि भू-राजनीतिक घटनाएं बाजार को अस्थिर बना रही हैं। जानें इस गिरावट के पीछे के कारण और निवेशकों की प्रतिक्रिया के बारे में।
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भारतीय शेयर बाजार में गिरावट: सेंसेक्स और निफ्टी में कमी

शुरुआती कारोबार में गिरावट


मुंबई: भारतीय शेयर बाजार ने तीन दिनों की तेजी के बाद मंगलवार को शुरुआती कारोबार में गिरावट का सामना किया। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में 1 प्रतिशत तक की कमी आई। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और विदेशी संस्थागत निवेशकों की निरंतर बिकवाली ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया है।


तेल की कीमतों का प्रभाव

तेल की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं, जिससे मुद्रास्फीति और भारत के आयात बिल को लेकर चिंता बढ़ गई है। अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ते तनाव ने वैश्विक संकेतों को प्रभावित किया है। पिछले सत्र में निफ्टी 23,000 के करीब बंद हुआ था, लेकिन आज चौड़े बाजार भी दबाव में हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि भू-राजनीतिक घटनाएं बाजार को अस्थिर बना रही हैं।


सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट

सुबह के कारोबार में सेंसेक्स 1.05 प्रतिशत गिरकर 73,326.61 पर आ गया, जबकि निफ्टी 0.9 प्रतिशत नीचे 22,771.75 पर पहुंच गया। निफ्टी मिडकैप 100 और स्मॉलकैप 100 इंडेक्स भी लगभग 1 प्रतिशत कमजोर रहे। तीन सत्रों की रैली के बाद यह सुधार निवेशकों को सतर्क कर रहा है। वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में उछाल और मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव मुख्य कारण बने। अमेरिका के राष्ट्रपति ने ईरान को होर्मुज खोलने की चेतावनी दी है, जिससे तेल आपूर्ति प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है। इससे भारतीय बाजार पर दबाव पड़ा है।


बैंकिंग और ऑटो शेयरों पर दबाव

बाजार में सेक्टरवार बिकवाली दर-संवेदनशील और उपभोक्ता क्षेत्रों में अधिक रही। निफ्टी ऑटो इंडेक्स लगभग 1.5 प्रतिशत गिरा, जबकि एफएमसीजी, रियल्टी और पीएसयू बैंक इंडेक्स में 1 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी बैंक इंडेक्स भी लगभग 1 प्रतिशत नीचे रहा। सूचना प्रौद्योगिकी शेयरों में थोड़ी मजबूती दिखी, लेकिन निफ्टी आईटी इंडेक्स 0.6 प्रतिशत नीचे रहा। बढ़ते तेल दाम से महंगाई का खतरा और आयात बिल बढ़ने की आशंका ने इन क्षेत्रों को प्रभावित किया है। निवेशक जोखिम लेने से बच रहे हैं और सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।


एफआईआई बिकवाली और भू-राजनीतिक चिंताएं

विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 6 अप्रैल को 8,167 करोड़ रुपये की बिकवाली की, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने खरीदारी के साथ सहारा दिया। जियो जित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट ने कहा कि एफपीआई बिकवाली रुपये की कमजोरी और अमेरिकी बॉंड यील्ड्स के कारण है। इससे अच्छी कंपनियों के वित्तीय शेयरों में लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मौके बन रहे हैं। एक विशेषज्ञ ने कहा कि बाजार भू-राजनीतिक घटनाओं के प्रति संवेदनशील बना रहेगा। अमेरिका की ईरान को दी गई होर्मुज वाली अल्टीमेटम बाजार की दिशा तय कर रही है।


विश्लेषकों की राय और बाजार का रुख

विश्लेषकों का मानना है कि बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है। एक ब्रोकिंग फर्म के विशेषज्ञ ने कहा कि निफ्टी में निचले स्तरों पर खरीदारी दिख रही है, लेकिन टिकाऊ रैली के लिए प्रमुख प्रतिरोध स्तरों को बनाए रखना आवश्यक होगा। तीन दिनों की रैली के बाद अब बाजार भू-राजनीतिक विकास और विदेशी बिकवाली पर नजर रख रहा है। यदि तेल की कीमतें और बढ़ीं, तो मुद्रास्फीति और आयात बिल बढ़ने से अर्थव्यवस्था पर दबाव पड़ेगा। निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है क्योंकि वैश्विक घटनाएं घरेलू बाजार को तेजी से प्रभावित कर रही हैं।