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भारतीय शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स और निफ्टी में कमी

मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में गिरावट आई, जिसमें सेंसेक्स 479.26 अंक और निफ्टी 118.00 अंक नीचे बंद हुए। विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका-ईरान के बीच तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के कारण यह गिरावट आई है। हालांकि, मिडकैप शेयरों में मजबूती बनी हुई है। जानें इस गिरावट के पीछे के कारण और बाजार की वर्तमान स्थिति के बारे में अधिक जानकारी।
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भारतीय शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स और निफ्टी में कमी

शेयर बाजार का हाल


मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार ने नकारात्मक रुख अपनाया। दिन के अंत में, सेंसेक्स 479.26 अंक या 0.63 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,009.70 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 118.00 अंक या 0.49 प्रतिशत की कमी के साथ 23,913.70 पर रहा।


सेंसेक्स में टेक महिंद्रा, इटरनल, मारुति सुजुकी, अदाणी पोर्ट्स, एचयूएल, एनटीपीसी और एलएंडटी जैसे शेयरों में बढ़त देखी गई। वहीं, ट्रेंट, भारती एयरटेल, टीसीएस, बजाज फाइनेंस, टाइटन, एक्सिस बैंक, एमएंडएम, आईसीआईसीआई बैंक, पावर ग्रिड, एचडीएफसी बैंक, अल्ट्राटेक सीमेंट, आईटीसी, कोटक महिंद्रा बैंक, एचसीएल टेक और एशियन पेंट्स में गिरावट आई।


बड़े शेयरों की तुलना में छोटे और मिडकैप शेयरों में तेजी आई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 332.30 अंक या 0.54 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 62,298.90 पर और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 64.50 अंक या 0.35 प्रतिशत की बढ़त के साथ 18,267.20 पर बंद हुआ।


सूचकांकों में मिश्रित कारोबार देखने को मिला। निफ्टी मेटल (1.10 प्रतिशत), निफ्टी एनर्जी (0.58 प्रतिशत), निफ्टी कमोडिटीज (0.48 प्रतिशत), निफ्टी इंडिया डिफेंस (0.27 प्रतिशत), निफ्टी एफएमसीजी (0.14 प्रतिशत) और निफ्टी ऑटो (0.07 प्रतिशत) में बढ़त रही।


हालांकि, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (1.05 प्रतिशत), निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज (0.65 प्रतिशत), निफ्टी प्राइवेट बैंक (0.62 प्रतिशत), निफ्टी सर्विसेज (0.60 प्रतिशत), निफ्टी रियल्टी (0.52 प्रतिशत), और निफ्टी पीएसई (0.50 प्रतिशत) में गिरावट आई।


विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच हालिया तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि और डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी के कारण बड़े शेयरों में हल्की गिरावट आई है। हालांकि, मिडकैप शेयरों में मजबूती बनी हुई है, जिससे इंडेक्स ने नए उच्चतम स्तर पर पहुंचने में सफलता पाई।


विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि घरेलू निवेशकों का समर्थन, विदेशी निवेशकों की निकासी के बावजूद, बाजार की भावना को बनाए रखता है। साप्ताहिक आधार पर कच्चे तेल की कीमतों में कमी के कारण, निवेशक पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की संभावनाओं पर नजर बनाए हुए हैं।